लखीमपुर खीरी हिंसा केस की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा—आरोपियों को बचाने की कोशिश?

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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की ट्रायल प्रक्रिया पर नाराजगी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की ट्रायल प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा—बिना कारण गवाह हटाए जा रहे, आरोपियों को डिस्चार्ज कराने की कोशिश दिख रही है।


🔴 ट्रायल की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामलों की सुनवाई में हो रही देरी और अभियोजन पक्ष के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह से गवाहों को हटाया जा रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों को डिस्चार्ज कराने की कोशिश की जा रही है।


⚖️ “अगर सख्त टिप्पणी की तो असर होगा”

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि अदालत इस मामले में “कड़ी टिप्पणियां” करती है, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि अभियोजन पक्ष कई गवाहों को बिना कोई कारण बताए हटाता जा रहा है।


📊 208 गवाहों से घटाकर 120

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल नंबर 219/2021 में शुरुआत में 208 गवाह प्रस्तावित थे।

हालांकि अब अभियोजन केवल लगभग 120 गवाहों को पेश करना चाहता है।

कोर्ट ने नोट किया कि:

  • 44 गवाहों को हटा दिया गया
  • 15 गवाहों को डिस्चार्ज किया गया
  • 72 गवाहों की गवाही अभी बाकी है

🚨 दूसरे ट्रायल की स्थिति भी कोर्ट के सामने

दूसरे संबंधित ट्रायल नंबर 220/2021 में कुल 35 गवाह प्रस्तावित थे

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इनमें से 26 गवाहों की गवाही हो चुकी है, जबकि 9 गवाह अभी बाकी हैं।


🧾 “कोई कारण नहीं बताया गया”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह तक स्पष्ट नहीं किया कि गवाहों की जांच क्यों नहीं हो पा रही है।

अदालत ने टिप्पणी की, “हम यह देखकर निराश हैं कि अभियोजन ने गवाहों की जांच न होने का कोई कारण नहीं बताया।”


🏛️ गवाह सुरक्षा योजना लागू करने का निर्देश

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए “कानूनी उपाय” अपनाए जाएं।

साथ ही, गवाह सुरक्षा योजना (Witness Protection Scheme) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा गया।


⚠️ प्रशांत भूषण ने उठाए गंभीर सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि मामले में “काफी चिंताजनक घटनाएं” सामने आ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि गवाहों के बयान से पहले पुलिस अधिकारी उनके घर जा रहे हैं।

भूषण ने कहा कि वह इन घटनाओं को हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर लाएंगे।


📜 आरोपी पक्ष ने मांगी सजा निलंबन पर सुनवाई

आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि मिश्रा “नौ साल से जेल में हैं” और उनकी सजा निलंबन याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि तत्काल सुनवाई की आवश्यकता होगी तो अदालत उस पर विचार करेगी।


🚗 2021 की हिंसा का मामला

यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी।

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अभियोजन के अनुसार, किसानों के प्रदर्शन के दौरान एक वाहन ने प्रदर्शनकारियों को कुचल दिया था।

इस घटना में चार किसानों की मौत हुई थी और वाहन को आरोपी आशीष मिश्रा से जुड़ा बताया गया था।


📌 जांच पूरी करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने घटना से जुड़े एक अन्य मामले में जांच अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

साथ ही, संबंधित ट्रायल जज को अदालत में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है।


🌐 “हेनियस क्राइम” मान चुका है हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही इस मामले को “जघन्य अपराध” (heinous crime) की श्रेणी में बता चुका है।

हाई कोर्ट ने कहा था कि किसानों की मौत और घटनास्थल पर आरोपी के वाहन की मौजूदगी महत्वपूर्ण परिस्थितियां हैं।


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