“ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी” का गठन
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देशभर की अदालतों की आधारभूत संरचना का आकलन करने के लिए “ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी” का गठन किया है। समिति हाईकोर्ट और जिला अदालतों की जरूरतों पर रिपोर्ट देगी।
Supreme Court of India के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने देशभर की अदालतों में आधारभूत संरचना (Judicial Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक विशेष “Judicial Infrastructure Advisory Committee” का गठन किया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस समिति का उद्देश्य देशभर की हाईकोर्ट और जिला अदालतों की अलग-अलग बुनियादी जरूरतों का आकलन कर एक समान और समन्वित न्यायिक ढांचा विकसित करना है।
पूरे देश के लिए एकीकृत न्यायिक ढांचा बनाने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न राज्यों और न्यायालयों की बुनियादी सुविधाओं में काफी असमानता है। ऐसे में एक “पैन-इंडिया यूनिफाइड इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम” तैयार करना समय की आवश्यकता है।
समिति अदालत परिसरों, न्यायिक कक्षों, डिजिटल सुविधाओं, रिकॉर्ड प्रबंधन, सुरक्षा, न्यायिक अधिकारियों के लिए बुनियादी संसाधनों और अन्य संरचनात्मक आवश्यकताओं का अध्ययन करेगी।
जस्टिस अरविंद कुमार करेंगे समिति की अगुवाई
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता Aravind Kumar करेंगे। समिति को देशभर की अदालतों की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति में विभिन्न हाईकोर्टों के न्यायाधीशों को भी शामिल किया गया है ताकि क्षेत्रीय और व्यावहारिक चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
समिति में शामिल हैं ये न्यायाधीश
समिति के अन्य सदस्य इस प्रकार हैं:
- Debangsu Basak — Calcutta High Court
- Ashwani Kumar Mishra — Punjab and Haryana High Court
- Somasekhar Sundaresan — Bombay High Court
इसके अलावा Central Public Works Department (CPWD) के महानिदेशक को भी समिति का सदस्य बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के महासचिव होंगे सदस्य सचिव
Supreme Court of India के महासचिव (Secretary General) समिति में सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे और समन्वय कार्य देखेंगे।
केंद्र और राज्यों के साथ होगी चर्चा
समिति अपनी रिपोर्ट सीधे मुख्य न्यायाधीश को सौंपेगी। रिपोर्ट पर विचार करने के बाद CJI केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे ताकि न्यायिक आधारभूत संरचना सुधारों को लागू किया जा सके।
न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम पहल
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, देशभर की अदालतों में लंबित मामलों का एक बड़ा कारण बुनियादी सुविधाओं की कमी भी है। कई जिला अदालतों में न्यायिक कक्षों, डिजिटल रिकॉर्डिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था अब भी नहीं है।
ऐसे में यह समिति न्यायपालिका के आधुनिकीकरण और अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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