‘महाभारत जैसी त्रासदी’: पटना हाईकोर्ट ने ट्रिपल मर्डर केस में दो दोषियों की फांसी बरकरार रखी

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पटना हाईकोर्ट ने रोहतास जिले के जमीन विवाद से जुड़े तिहरे हत्याकांड में दो सगे भाइयों की मौत की सजा को बरकरार रखते हुए इसे ‘दुर्लभतम मामलों’ में से एक बताया और फैसले में महाभारत की कथा का उल्लेख किया।

‘महाभारत जैसी त्रासदी’: पटना हाईकोर्ट ने ट्रिपल मर्डर केस में दो दोषियों की फांसी बरकरार रखी

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के रोहतास जिले में हुए ट्रिपल मर्डर केस में दोषी ठहराए गए दो सगे भाइयों को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में मौत की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध को देखकर महाभारत की कथा की याद आती है, जिसमें जमीन और सत्ता की लालसा ने अपनों का ही खून बहा दिया था।

67 पेज का फैसला, ‘दुर्लभतम मामला’ करार

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडे की खंडपीठ ने मामले में 67 पृष्ठों का विस्तृत निर्णय सुनाया। कोर्ट ने इस तिहरे हत्याकांड को “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” की श्रेणी में रखते हुए कहा कि समाज पर इसके दूरगामी और विनाशकारी प्रभाव पड़े हैं।

यह हत्याकांड 13 जुलाई 2021 को हुआ था। इससे पहले, 2 मई 2024 को रोहतास के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अनिल सिंह और सोनल सिंह को दोषी ठहराया था, जबकि 9 मई 2024 को उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी।

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क्या है पूरा मामला?

रोहतास जिले के खुदराव गांव में रहने वाले विजय सिंह और उनके बेटों दीपक सिंह एवं राकेश सिंह का अपने पट्टेदारों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। घटना की शाम आरोपियों अजय सिंह, सोनल सिंह और अमन सिंह ने तीनों पिता-पुत्रों पर लाठी-डंडों और तलवार से हमला कर दिया।

हमले में तीनों को गंभीर चोटें आईं। विजय सिंह की पत्नी शकुंतला देवी ने आसपास के लोगों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई आगे नहीं आया। पुलिस को सूचना देने के बाद तीनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अदालत की भावुक टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा—

“इस मामले को देखने पर महाभारत की याद आती है। चचेरे भाइयों के बीच जमीन और सत्ता के लिए विनाशकारी संघर्ष हुआ था। कौरव आक्रमणकारी थे, जिन्होंने अपने ही रिश्तेदारों का रक्त बहाया। उस कथा का अंत भी अत्यंत दुखद था।”

अदालत ने आगे कहा कि इसी तरह इस हमले में न केवल तीन निर्दोष लोगों की जान गई, बल्कि उनके परिवार की महिलाओं के लिए भी यह जीवनभर का आघात बन गया। अपने प्रियजनों को खोने के बाद घर में अब केवल रोते-बिलखते बच्चे ही बचे हैं।

फांसी की सजा बरकरार

इन सभी तथ्यों और अपराध की क्रूरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को सही ठहराया और कहा कि यह मामला दया या रियायत के योग्य नहीं है।

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यह फैसला जमीन विवाद से उपजे हिंसक अपराधों में न्यायिक सख्ती और समाज को स्पष्ट संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।


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