मुकदमे की कार्यवाही में गवाह के रूप में कार्य करने वाले पक्ष और गवाह के बीच कोई अंतर नहीं; जिरह के चरण में दोनों दस्तावेज पेश कर सकते हैं: SC

Supreme Court Of India

LANDMARK JUDGMENT OF SUPREME COURT

जिरह सहित गवाह का बयान या तो उसी दिन या अगले दिन दर्ज किया जाना चाहिए: SC

CrPC की धारा 309 कार्यवाही को स्थगित करने या स्थगित करने की शक्ति से संबंधित है- सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी मामले में गवाह के बयान को लेकर अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांचकर्ता (एक्जामिनेशन इन चीफ) को जिरह के बाद उसी दिन या अगले दिन गवाह का बयान दर्ज किया … Read more

Journalist Rajdev Ranjan Murder Case: सीबीआई द्वारा मृत घोषित गवाह आधार, पैन कार्ड लेकर पहुंची कोर्ट, कही – हुजूर मैं जिंदा हूं-

Journalist Rajdev Ranjan Murder Case – मुजफ्फरपुर के विशेष कोर्ट Special Court के जज पुनीत कुमार गर्ग के समक्ष एक महिला ने आवाज लगाई हुजूर, मैं जिंदा हूं। मैं मरी नहीं हूं जबकि सीबीआई ने मुझे मृत घोषित कर दिया है। मैं अब भी सीवान के कसेरा टोला स्थित घर में रहती हूं। सीवान में … Read more

सुप्रीम कोर्ट: अदालत में आरोपी की पहचान करने वाले गवाह की गवाही केवल इसलिए खारिज नहीं की जा सकती है, क्योंकि परीक्षण पहचान परेड नहीं की गई-

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि किसी मामले में गवाह की गवाही की अन्य तरीके से पर्याप्त पुष्टि हो सकती है। अदालत ने इस प्रकार की टिप्पणी केरल आबकारी अधिनियम की धारा 55 (ए) के तहत दोषी ठहराए गए आरोपियों द्वारा दायर अपील की अनुमति देने वाले फैसले … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने जिरह की प्रक्रिया अचानक स्थगित करने का संज्ञान लिया और कहा कि ऐसा करने से न्याय वाधित होता है-

सर्वोच्च अदालत ने जिरह की प्रक्रिया अचानक स्थगित करने का संज्ञान लिया और कहा कि इससे ऐसे हालात पैदा होते हैं जिससे निजी गवाह मुकर जाते हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि तय समय में आरोपपत्र का संज्ञान नहीं लेने पर जमानत का अधिकार नहीं। Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशभर … Read more

धारा 165 IEA: न्यायाधीश को न्यायतंत्र के अंतर्गत एक स्वतंत्र शक्ति प्रदान करती है-

यह धारा, पीठासीन न्यायधीश को गवाहों एवं पक्षकारों से सवाल करने का अधिकार सौंपती है- न्यायाधीश को न्याय देने में प्रभावी तौर पर उभारना है तो पीठासीन न्यायाधीश को महज़ एक दर्शक और एक रिकॉर्डिंग मशीन नहीं होना चाहिए कि वह मामले को बस सुने और एक टाइपिस्ट की तरह अपना निर्णय सुना दे। उसे … Read more