HC ने कहा कि याचिका उनके अवैध संबंधों पर न्यायालय की मुहर प्राप्त करने के लिए दायर किया गया है-

HC ने कहा कि “लिव-इन रिलेशन” एक ऐसा रिश्ता है जिसे कई अन्य देशों के विपरीत भारत में सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है- पति और पत्नी होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ताओं के जीवन की सुरक्षा की मांग करने वाली एक याचिका पर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिका उनके अवैध … Read more

अगर महिला पुरुष एक साथ लिव इन में रहते हैं, तो कानून के मुताबिक इसे विवाह जैसा ही माना जायेगा: उच्चतम न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को अपने फैसले की एक प्रति अग्रेषित करने का भी निर्देश दिया– Supreme Court Verdict on Live In Relationship – अगर कोई पुरुष और महिला लंबे समय से साथ रहते हैं तो कानून के मुताबिक इसे विवाह जैसा ही माना जाएगा और उनके … Read more

‘Live-In Relationships’ सवैधानिक अधिकारों में आर्टिकल 21 का ‘बायप्रोडक्ट’ है जो तीव्र कामुक व्यवहार और व्याभिचार को बढ़ावा दे रहा है-

मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय इंदौर पीठ Indore Bench of Madhya Pradesh High Court ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ Live-In Relationships संविधान के अनुच्छेद 21 Article 21 of Indian Constitution के तहत मिले अधिकारों का ‘बायप्रोडक्ट’ Byproduct बन गया है। इसकी वजह से यौन अपराधों में वृद्धि हो रही है। … Read more

उच्च न्यायालय: लड़के का उम्र विवाह योग्य नहीं होने पर भी ‘लिव-इन कपल’ के जीवन के अधिकार को वंचित नहीं किया जा सकता-

‘Article 21 of the Constitution stipulates protection of life and liberty to every citizen and that no person shall be deprived of his life and personal liberty except according to procedure established by law.’ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय Punjab & Haryana High Court ने हाल ही में कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप Live in Relationship … Read more

“लिव-इन-रिलेशनशिप” जीवन का अभिन्न अंग बन गया है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित है – इलाहाबाद हाई कोर्ट

न्यायलय ने एक इंटरफेथ लिव-इन कपल द्वारा महिला के रिश्तेदारों से अपनी जान को खतरा होने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं। उच्च न्यायालय ने कहा कि लिव-इन संबंधों को सामाजिक नैतिकता की धारणा के बजाय व्यक्तिगत स्वायत्तता के लेंस से देखा जाना चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल … Read more