कानूनी पेशा अभी भी मुख्य रूप से एक शहरी पेशा है, कानून को अक्सर एक अमीर आदमी के पेशे के रूप में देखा गया है – सीजेआई

कानून बिरादरी में महिलाओं की भागीदारी की कमी- देश के मुख्य न्यायाधीश Chief Justice of India Justice एनवी रमन्ना ने कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कानून को अक्सर अमीर लोगों Rich People का पेशा माना जाता रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने न्यायालयों में जजों की कमी … Read more

धारा 165 IEA: न्यायाधीश को न्यायतंत्र के अंतर्गत एक स्वतंत्र शक्ति प्रदान करती है-

यह धारा, पीठासीन न्यायधीश को गवाहों एवं पक्षकारों से सवाल करने का अधिकार सौंपती है- न्यायाधीश को न्याय देने में प्रभावी तौर पर उभारना है तो पीठासीन न्यायाधीश को महज़ एक दर्शक और एक रिकॉर्डिंग मशीन नहीं होना चाहिए कि वह मामले को बस सुने और एक टाइपिस्ट की तरह अपना निर्णय सुना दे। उसे … Read more

जुडिशल ऑफिसर्स के सुरक्षा को लेकर हलफनामा दायर नहीं होने पर शीर्ष अदालत सख्त-

अदालत ने कहा लगेगा राज्यों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना- शीर्ष अदालत (Supreme Court) सभी न्यायिक अधिकारियों (जुडिशल ऑफिसर्स) को एक्स श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने की मांग वाली याचिका पर 17 अगस्त यानी आज को सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान जजों और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में … Read more