‘कोर्ट नंबर 1 में फाइल पढ़ते वक्त लिखते होंगे चुटकुले’: CJI ने SG तुषार मेहता पर ली चुटकी

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तुषार भाई ने भगवान से दिन का 25वां घंटा हासिल कर लिया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो किताबों के लॉन्च पर CJI सूर्यकांत और अमित शाह की हल्की-फुल्की टिप्पणियां चर्चा में रहीं। अदालत, कानून और हास्य का अनोखा संगम देखने को मिला।


कानूनी दुनिया का हल्का और ‘बिज़ार’ चेहरा

SG Mr. Tushar Mehta ने रविवार को अपनी दो गैर-काल्पनिक किताबें — The Bench, The Bar and the Bizarre और The Lawful and the Awful — लॉन्च कीं। कार्यक्रम में कानून, राजनीति और न्यायपालिका की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं।

इन किताबों में मेहता ने विदेशी अदालतों से जुड़े वास्तविक लेकिन हास्यपूर्ण और विचित्र किस्सों के जरिए कानूनी पेशे के हल्के पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की है।


भारतीय अदालतों को जानबूझकर रखा बाहर

कार्यक्रम के दौरान तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जानबूझकर भारतीय अदालतों, न्यायाधीशों और मामलों को किताबों में शामिल नहीं किया।

उन्होंने कहा,
“मैं अभी भारत में प्रैक्टिस कर रहा हूं और आने वाले वर्षों तक करता रहूंगा। इसलिए मैंने भारतीय न्यायपालिका से जुड़े किस्सों को किताब में शामिल नहीं किया।”


अमित शाह, CJI और वरिष्ठ न्यायाधीश रहे मौजूद

किताबों के विमोचन समारोह में Amit Shah, CJI Surya Kant, J R. Venkataramani सहित सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश तथा वरिष्ठ वकील मौजूद रहे।


‘यह कोई कानूनी टीका-टिप्पणी नहीं’

तुषार मेहता ने कहा कि उनकी किताबें पारंपरिक कानूनी लेखन से अलग हैं।

उन्होंने कहा,
“ये न तो कोई कानूनी ग्रंथ हैं, न ही आलोचनात्मक लेखन। यह सिर्फ सच्ची घटनाओं का संग्रह है।”

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उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि आमतौर पर वे अदालतों में जजों के सामने पेश होते हैं, साहित्यिक मंचों पर नहीं।


अमित शाह की हल्की-फुल्की टिप्पणी

गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में हास्यपूर्ण अंदाज में कहा कि उनकी मौजूदगी को लोग केवल साहित्यिक कार्यक्रम की तरह नहीं देखेंगे, बल्कि “कोर्ट और सरकार के रिश्तों” के चश्मे से देखेंगे।

उन्होंने कहा कि मीडिया को इस कार्यक्रम से कोई विवादित बयान नहीं मिलने वाला।


CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ने लूटी महफिल

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा CJI Surya Kant की टिप्पणियों की रही।

CJI ने कहा कि तुषार मेहता ने अदालतों की गंभीरता के पीछे छिपे मानवीय और हास्यपूर्ण पक्ष को सामने लाने की कोशिश की है। उन्होंने किताबों की तुलना “ऐसे कोर्टरूम ड्रामा” से की जो अचानक स्टैंड-अप कॉमेडी में बदल जाए।


‘तुषार भाई के पास शायद दिन का 25वां घंटा है’

CJI ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि देश के सबसे व्यस्त संवैधानिक पदों में से एक संभालने वाले तुषार मेहता ने दो किताबें लिखने का समय कैसे निकाला।

उन्होंने कहा,
“मेरे पास दो थ्योरी हैं — या तो तुषार भाई ने भगवान से दिन का 25वां घंटा हासिल कर लिया है, या फिर कोर्ट नंबर 1 में फाइल पढ़े जाने के दौरान वे हास्य लेखन करते हैं।”

इस टिप्पणी पर पूरे सभागार में ठहाके गूंज उठे।


भारतीय अदालतों पर लिखते तो ‘मेंटशनिंग’ खारिज हो जाती: CJI

CJI ने तुषार मेहता को चुटकी लेते हुए कहा कि भारतीय अदालतों को किताब से बाहर रखना शायद “साहित्यिक निर्णय” कम और “सर्वाइवल इंस्टिंक्ट” ज्यादा था।

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उन्होंने कहा,
“अगर उन्होंने भारतीय जजों और अदालतों की आदतों पर लिखा होता तो कोर्ट नंबर 1 में उनकी अगली मेंशनिंग बिना रिव्यू के ही खारिज हो जाती।”


‘तीसरी किताब भारतीय अदालतों पर लिखिए’

CJI ने सुझाव दिया कि तुषार मेहता को अपनी तीसरी किताब भारतीय न्यायपालिका पर लिखनी चाहिए क्योंकि यहां “कॉमिक किस्सों की कोई कमी नहीं” है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अदालतों की कहानियां अकेले एक लाइब्रेरी भर सकती हैं।


कानून के पीछे का मानवीय चेहरा

अपने संबोधन के अंत में CJI ने कहा कि अदालतें सिर्फ आदेश, आपत्तियों और दलीलों का मंच नहीं हैं, बल्कि वहां इंसानी भावनाएं, हास्य और विचित्रताएं भी मौजूद रहती हैं।

उन्होंने कहा,
“कानून केवल आदेशों और आपत्तियों तक सीमित नहीं है। इसके बीच में मानवीय हास्य भी चलता रहता है।”


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