25 साल की सजा काट रहे विकास यादव को 12 मई से 22 मई 2026 तक फरलो पर रिहा करने की अनुमति-SC

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नितीश कटारा हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव को 10 दिन की फरलो दी

सुप्रीम कोर्ट ने नितीश कटारा हत्याकांड में 25 साल की सजा काट रहे विकास यादव को 12 मई से 22 मई 2026 तक फरलो पर रिहा करने की अनुमति दी। कोर्ट ने पहले फरलो की शर्तों के पालन और हालिया विवाह को ध्यान में रखा।

Supreme Court of India ने सोमवार को चर्चित Nitish Katara Murder Case में सजा काट रहे Vikas Yadav की फरलो याचिका स्वीकार करते हुए उसे 10 दिनों के लिए जेल से अस्थायी रिहाई की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति BV Nagarathna और न्यायमूर्ति Ujjal Bhuyan की पीठ ने आदेश दिया कि विकास यादव को 12 मई 2026 से 22 मई 2026 तक फरलो पर रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे 22 मई को शाम 5 बजे तक संबंधित जेल प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

पहले भी मिली थी फरलो, समय पर लौटने को कोर्ट ने माना अहम

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विकास यादव को इससे पहले 27 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक फरलो दी गई थी और उसने सभी शर्तों का पालन करते हुए समय पर जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

पीठ ने कहा कि पूर्व में दी गई राहत के दौरान उसके आचरण को देखते हुए वर्तमान फरलो याचिका पर सकारात्मक विचार किया गया है।

हालिया विवाह और सजा पूरी होने का भी दिया हवाला

सुनवाई के दौरान विकास यादव की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उसका विवाह पिछले वर्ष हुआ है और वह मई 2027 में बिना किसी रिमिशन के अपनी 25 वर्ष की सजा पूरी कर लेगा।

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष अनुमति याचिका (SLP) के गुण-दोष पर अंतिम सुनवाई लंबित है और इसी बीच अपने वैवाहिक एवं पारिवारिक दायित्वों की तैयारी के लिए याचिकाकर्ता फरलो चाहता है।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की है।

क्या होती है फरलो?

फरलो जेल से अस्थायी रिहाई की एक कानूनी व्यवस्था है। यह सजा की समाप्ति या माफी नहीं होती, बल्कि लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को सीमित अवधि के लिए राहत देने का प्रावधान है।

आमतौर पर फरलो अच्छे आचरण वाले कैदियों को दी जाती है ताकि वे पारिवारिक और सामाजिक संबंध बनाए रख सकें। फरलो की अवधि पूरी होने के बाद कैदी को पुनः जेल में लौटना अनिवार्य होता है।

2002 में हुआ था नितीश कटारा हत्याकांड

Nitish Katara की हत्या फरवरी 2002 में हुई थी। अभियोजन के अनुसार, विकास यादव और उसके चचेरे भाई Vishal Yadav ने 16-17 फरवरी 2002 की रात एक शादी समारोह से नितीश कटारा का अपहरण किया और बाद में उसकी हत्या कर दी।

मामले में आरोप था कि नितीश कटारा का संबंध विकास यादव की बहन Bharti Yadav से था, जिसका परिवार विरोध कर रहा था।

ट्रायल कोर्ट ने 2008 में ठहराया था दोषी

मई 2008 में ट्रायल कोर्ट ने विकास यादव को हत्या का दोषी ठहराया था। बाद में 3 अक्टूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव और विशाल यादव को बिना किसी रिमिशन के 25 वर्ष की सजा सुनाई थी।

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विकास यादव, उत्तर प्रदेश के विवादित राजनेता DP Yadav का बेटा है। इस मामले को देश के चर्चित “ऑनर किलिंग” मामलों में गिना जाता है, जिसने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया था।

ऑनर किलिंग मामलों में बना मिसाल

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नितीश कटारा हत्याकांड भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मामला माना जाता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसमें “ऑनर” के नाम पर की गई हिंसा के खिलाफ सख्त संदेश दिया था।

यह मामला राजनीतिक प्रभाव, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के टकराव का प्रतीक बन गया था।

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