रॉबर्ट वाड्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झूठे और भ्रामक बयान देने का आरोप
दिल्ली हाई कोर्ट में ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झूठे और भ्रामक बयान देने का आरोप लगाया। गुरुग्राम भूमि सौदे से जुड़े मामले में कोर्ट ने सुनवाई 18 मई तक टाली।
Delhi High Court से गुरुवार को Robert Vadra को बड़ा झटका लगा। Enforcement Directorate (ED) ने अदालत में दावा किया कि वाड्रा ने अपने खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में “झूठे और गलत बयान” दिए हैं।
यह मामला गुरुग्राम में हुए कथित भूमि सौदों और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) आरोपों से संबंधित है। ट्रायल कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को मामले का संज्ञान लेते हुए वाड्रा को समन जारी किया था।
ED ने कोर्ट में कहा- “पूरी तरह झूठे दावे”
ED की ओर से अधिवक्ता Zoheb Hossain अदालत में पेश हुए और वाड्रा की उस दलील का कड़ा विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि जिन अपराधों का आरोप उन पर लगाया गया है, वे कथित अपराध की अवधि (2008-2012) के बाद ही Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) की अनुसूची में जोड़े गए थे।
ED ने अदालत से कहा कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
ईडी के वकील ने कहा:
“धारा 467 IPC अपने मूल रूप में PMLA की अनुसूची में पहले से मौजूद थी। प्रथम दृष्टया पूरी तरह झूठे और गलत बयान दिए गए हैं।”
उन्होंने यह भी मांग की कि अदालत वाड्रा की याचिका पर हर्जाना लगाए।
अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाया पूर्वव्यापी प्रभाव का मुद्दा
वाड्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि मामले में कुछ अपराध बाद में PMLA अनुसूची में जोड़े गए, इसलिए कानून के पूर्वव्यापी (retrospective) प्रभाव और अदालत के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
सिंघवी ने कहा कि ये मुद्दे पहले निचली अदालत के समक्ष भी उठाए गए थे, लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया।
हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 मई तक टाली
दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति Manoj Jain ने मामले की सुनवाई 18 मई तक स्थगित कर दी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिंघवी से कहा:
“कृपया सोमवार को इस मुद्दे पर पूरी तैयारी के साथ आएं, क्योंकि यही आपका मुख्य आधार है।”
अब अदालत अगले सप्ताह इस बात पर विस्तार से सुनवाई करेगी कि क्या कथित अपराधों पर PMLA लागू किया जा सकता है।
क्या है गुरुग्राम भूमि सौदे का मामला?
यह मामला वर्ष 2008 में गुरुग्राम में हुए एक भूमि सौदे से जुड़ा है। आरोप है कि वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने 3.5 एकड़ जमीन लगभग 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
ED का आरोप है कि:
- जमीन की खरीद फर्जी बिक्री विलेख के जरिए की गई,
- पंजीकरण के समय वास्तविक भुगतान घोषित नहीं किया गया,
- और यह जमीन कथित तौर पर रिश्वत के रूप में दी गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस सौदे का उद्देश्य तत्कालीन हरियाणा मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda पर प्रभाव डालकर आवासीय लाइसेंस प्राप्त करना था।
DLF को 58 करोड़ में बेचने का आरोप
आरोपों के मुताबिक, लाइसेंस जारी होने के लगभग चार साल बाद यही जमीन DLF Limited को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
मामले में यह भी आरोप है कि गुरुग्राम के वज़ीराबाद क्षेत्र में करीब 350 एकड़ जमीन कथित रूप से अनियमित तरीके से DLF को आवंटित की गई, जिससे कंपनी को लगभग 5,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।
राजनीतिक और कानूनी रूप से अहम मामला
यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। ED इस मामले को कथित भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय लेनदेन से जोड़कर देख रही है, जबकि वाड्रा पक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताता रहा है।
अब सबकी नजर 18 मई की सुनवाई पर रहेगी, जहां दिल्ली हाई कोर्ट PMLA की वैधता, पूर्वव्यापी प्रभाव और ट्रायल कोर्ट के संज्ञान आदेश पर विस्तार से विचार करेगा।
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