वसीम रिजवी के हिंदू बन जाने से, पत्नी-बच्चों के कानूनी एवं सामाजिक अधिकारों पर क्‍या होगा जानिए-

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परिवार में संपत्ति, शादी, तलाक समेत हर तरह की प्रक्रिया परिजनों के मुस्लिम धर्म के मुताबिक ही चलेगी

शिया वक्‍फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है. सोमवार सुबह गाजियाबाद के डासना मंदिर में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने उन्हें सनातन धर्म में शामिल कराया. वसीम रिजवी ने अपना नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (Jitendra Narayan Singh Tyagi) रखा है.

वसीम रिजवी के धर्म परिवर्तन को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. इन सवालों के साथ धर्म परिवर्तन को लेकर एक नई चर्चा भी चल पड़ी है.

पहला सवाल यही कि क्‍या वसीम रिजवी के इस्‍लाम छोड़ हिंदू धर्म अपनाने के बाद क्‍या उनके परिवार की पहचान भी बदल जाएगी?

क्‍या केवल वसीम रिजवी के हिंदू बनने से परिवार के बाकी सारे सदस्‍य भी हिंदू बन जाएंगे?

सनातन धर्म में मान्‍यता है कि व्‍यक्ति जन्‍म से हिंदू होता है, अब सवाल यह है कि क्‍या एक मुस्लिम नागरिक को धर्म गुरु हिंदू बना सकता है?

आइए समझते हैं इन सभी सवालों के उत्तर-

कैसे बदला जाता है धर्म और क्‍या है इसका तरीका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस सीबी पांडे ने धर्म बदलने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि आपको कोर्ट में एफिडेटिव बनवाना होगा, ये नाम था, अब मुस्लिम से हिंदू धर्म बदल रहा हूं, नाम पिता का नाम देकर एफिडेविट देना होता है. उस हलफनामे के आधार पर अखबार में विज्ञापन देना होगा कि मैंने धर्म बदल दिया है. सरकार मान्यता दे इसलिए गजट में नोटिफाई करना होता है. हर जिले में गजट होता है. वहां मान्यता लेनी होती है. डीएम नोटिफाई करते हैं, उस डॉक्यूमेंट के आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है.

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धर्मगुरु धर्म परिवर्तन करा सकता है?

धर्मगुरु के धर्म परिवर्तन को लेकर रिटायर्ड जस्टिस सीबी पांडे ने कहा कि धार्मिक प्रक्रिया हर धर्म में है, क्रिश्चन में आसान प्रक्रिया है, मुस्लिम में कलमा पढ़ा देते हैं, हिंदू धर्म में कोई निर्धारित प्रक्रिया नहीं हैं. आर्यसमाज में प्रोटोकॉल है कि उसे फॉलो करिए, मंदिर में भी शुद्धि कार्यक्रम होता है. शुद्धि पूजा के बाद धर्म परिवर्तन होता है, हर मंदिर में अलग अलग प्रक्रिया, नाम दिया जाता है. नाम परिवर्तन के साथ धर्मपरिवर्तन के साथ बताया जाता है कि हिंदू धर्म एक जीवन प्रक्रिया है, पूजा पाठ, चारों धाम जाना, इस जीवन की प्रक्रिया को भी अपनाना होगा, सिर्फ नाम बदलने से धर्म नहीं बदल जाता है.

नाम बदलकर मंदिर में पूजा करने से बदल सकता है व्‍यक्ति का धर्म

रिटायर्ड जस्टिस सीबी पांडे ने कहा, धर्म परिवर्तन तो हो गया लेकिन कानूनी फायदा उठाना चाहते हैं तो हलफनामा देकर नोटिफाई करना होगा. डीएम के सर्टिफिकेट के बाद हर जगह से नाम बदलेगा. जैसे नाम बदलने की प्रक्रिया की तरह धर्म बदलने में भी अपनाना होगा. सारे सर्टिफिकेट में जाकर नाम बदलवाना होगा.

एक नागरिक के धर्म पर‍िवर्तन करने से परिवार का भी धर्म बदल जाता है?

एक व्यक्ति के धर्म परिवर्तन करने से क्या पत्नी-बच्चों का भी धर्म बदल जाता है? इस सवाल पर रिटायर्ड जस्टिस सीबी पांडे ने कहा कि पति के धर्म बदल लेने से पत्नी और बच्चों का धर्म नहीं बदलेगा. अगर वो बदलवाना चाहते हैं तो बदलेगा. उन्हें फोर्स नहीं किया जा सकता. यानी वसीम रिजवी भले अब सनातन धर्म ग्रहण कर लें लेकिन परिवार का धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है.

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पिता के धर्म बदलने से कानूनी तौर पर परिवार कौन से धर्म का पालन करेगा?

रिटायर्ड जस्टिस सीबी पांडे ने बताया कि जो जिस धर्म का है, उसी हिसाब से चलेगा. उन्होंने कहा कि सारा मुस्लिम परिवार धर्म बदलता है तो हिंदू धर्म के हिसाब से चलेगा. कुछ हिंदू हैं, कुछ मुस्लिम तो जो जिस धर्म का उसी हिसाब से चलेगा. यानी भले वसीम रिजवी अब खुद को सनातन धर्म का कहें. लेकिन उनकी पत्नी, उनके बच्चे जब तक खुद अपनी इच्छा से धर्म नहीं बदलते, वो मुस्लिम ही रहेंगे. परिवार में संपत्ति, शादी, तलाक समेत हर तरह की प्रक्रिया परिजनों के मुस्लिम धर्म के मुताबिक ही चलेगी. वसीम रिजवी के जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी बन जाने के कारण हिंदू धर्म के मुताबिक ही चलेगी.