एक व्यक्ति जो समझौता डिक्री में पक्षकार नहीं था, वह समझौता डिक्री को रद्द करने के लिए स्वतंत्र मुकदमा दायर करने का हकदार है: HC

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना कि एक व्यक्ति जो समझौता डिक्री में पक्षकार नहीं था, वह समझौता डिक्री को रद्द करने के लिए एक स्वतंत्र मुकदमा दायर करने का हकदार है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 115 के तहत न्यायालय की धारवाड़ पीठ के समक्ष एक याचिका … Read more

लोक अदालत ने बनाया कीर्तिमान, एक दिन में एक लाख 72 हजार से अधिक वादों का निस्तारण करके, वसूला रुपया 3428.67 करोड़ जुर्माना

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी जिला न्यायालय परिसरों, दिल्ली उच्च न्यायालय, स्थायी लोक अदालतों, ऋण वसूली ट्रिब्यूनल, राज्य उपभोक्ता आयोग एवं जिला उपभोक्ता आयोग में शनिवार को साल 2024 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया. इस दौरान दिल्ली के कुल मिलाकर एक लाख 72 … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने “जानबूझकर आज्ञा का उल्‍लंघन” करने पर स्टेट बैंक को लगाई फटकार, अवमानना कार्रवाई की दी चेतावनी

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चुनावी बॉन्‍ड ELECTORAL BOND के मामले में सुप्रीम कोर्ट SUPREME COURT ने सोमवार को पिछले महीने के आदेश की “जानबूझकर आज्ञा का उल्‍लंघन” करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक को कड़ी फटकार लगाई। चुनावी बॉन्‍ड के दाताओं और प्राप्तकर्ताओं के बारे में डेटा 6 मार्च तक जारी किया जाना चाहिए था। मामले की सुनवाई के … Read more

पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6 के तहत ‘कार्यवाही’ का मतलब केवल आरोप पत्र दाखिल करने और संज्ञान लेने के बाद दर्ज किया गया आपराधिक मामला नहीं है: HC

तत्काल प्रभाव से यूपी लोक सेवा अधिकरण

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 के तहत, ‘कार्यवाही’ शब्द का अर्थ केवल आरोप पत्र प्रस्तुत करने और संज्ञान लेने के बाद दर्ज किया गया आपराधिक मामला नहीं है। अदालत एक महिला द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें पासपोर्ट अधिकारियों को आवेदन पर कार्रवाई करने … Read more

आईपीसी की धारा 498A के तहत आपराधिक मामले में महज बरी हो जाना तलाक का आधार नहीं हो सकता – दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्नी द्वारा आईपीसी की धारा 498ए IPC Sec 498A के तहत दायर आपराधिक मामले में महज बरी होना पति को तलाक Divorce देने का आधार नहीं है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक आपराधिक मामले में पति के बरी होने के बावजूद, वह प्रतिवादी-पत्नी के साथ … Read more

सीआरपीसी की धारा 311, इसे तब लागू किया जाना चाहिए जब यह मामले के उचित निर्णय के लिए आवश्यक हो – इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय Allahabad High Court ने पाया कि CrPC धारा 311, इसे तब लागू किया जाना चाहिए जब यह मामले के उचित निर्णय के लिए आवश्यक हो। अदालत ने यह कहते हुए कहा कि अंतिम बहस के चरण में जांच अधिकारी को गवाह के रूप में बुलाना किसी मामले के उचित निर्णय के लिए … Read more

लंबे विलंब के बाद अनुरोध किए जाने पर किसी भी अदालत को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 25(4) के तहत नमूना परीक्षण कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता – झारखंड उच्च न्यायालय

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सशरीर रात 9:00 बजे उपस्थित होने का आदेश

झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि लंबे विलंब के बाद अनुरोध किया जाता है, तो न्यायालय औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 25(4) के तहत नमूना परीक्षण कराने के लिए बाध्य नहीं है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता अदालत से शेष नमूने के दूसरे हिस्से को केंद्रीय औषधि … Read more

सीआरपीसी की धारा 125 के तहत बहू अपने सास-ससुर से भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती: कर्नाटक उच्च न्यायालय

कर्नाटक हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को विवाह और तलाक प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देने वाले सरकारी आदेश पर सवाल उठाया

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि अपने सास-ससुर के ख़िलाफ़ एक बहू सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती। एक मृत व्यक्ति (दिवंगत पति) की पत्नी और बच्चों ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका दायर की थी। सास-ससुर (दिवंगत पति के माता-पिता) से भरण-पोषण अनुदान की मांग करना। … Read more

जेल की सजा काटने के बाद पत्नी की एफआईआर से बरी हुआ पति, तलाक के लिए आरोपों को आधार नहीं बना सकता- हाई कोर्ट

DELHI HIGH COURT ने हाल ही में एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए तलाक नहीं दिया जा सकता क्योंकि उसे उसकी पत्नी की ओर से दायर क्रूरता के केस में एक आपराधिक अदालत की ओर से बरी कर दिया गया है। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल … Read more

रेप केस में आरोपी का नाम फैसले के रिकॉर्ड से हटाया जाना…मद्रास हाई कोर्ट ने भूलने के अधिकार के आधार पर क्यों दिया ये फैसला? जाने विस्तार से-

Rights To Be Forgotten भूलने का अधिकार: मद्रास उच्च न्यायालय ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी की ऑनलाइन पहचान मिटाने का आदेश दिया है। मदुरै हाई कोर्ट की बेंच ने आदेश इंडियन लॉ वेबसाइट (इंडियन कानून वेबसाइट) को भेज दिया। कोर्ट से मांग की गई कि रेप मामले में फैसले की कॉपी जब्त की … Read more