सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: मतगणना की पुनर्समीक्षा पर नया दृष्टिकोण

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: मतगणना की पुनर्समीक्षा पर नया दृष्टिकोण यहां सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले विजय बहादुर बनाम सुनील कुमार (2025 INSC 332) की विस्तृत कानूनी समीक्षा दी गई है, जिसमें चुनावी विवादों में वोटों की पुनर्गणना (Recount) की प्रक्रिया और विधिक मानकों पर प्रकाश डाला गया है। इस मामले में प्रमुख पक्षकार … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति में विफलता पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को फटकार लगाई

Supreme Court Of India

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति में विफलता पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को फटकार लगाई सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2021 के अपने फैसले और उसके बाद जारी आदेशों का पालन न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई है, जिसमें … Read more

क्या एफआईआर में संदिग्धों की जाति का उल्लेख जरूरी है? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उठाया सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट

एफआईआर में जाति के उल्लेख पर सवाल उठाने वाली इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से सवाल किया है कि किसी भी केस की एफआईआर में संदिग्धों की जाति का उल्लेख करने की आवश्यकता क्यों है। अदालत ने पुलिस के शीर्ष अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य भविष्य निधि योजना के तहत सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किया, कहा की जब उच्च न्यायालय ने समान श्रेणी के व्यक्तियों को राहत दे दी थी, तो उसे प्रोफेसर की याचिका खारिज नहीं करनी चाहिए थी

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्रोफेसर की अपील को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि उन्हें सामान्य भविष्य निधि, पेंशन और ग्रेच्युटी योजना के तहत सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि उच्च न्यायालय ने समान स्थिति में रखे गए व्यक्तियों … Read more

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहना गलत, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति को ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहना भले ही अनुचित और अशोभनीय हो, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 298 के तहत धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला अपराध नहीं माना जा सकता। यह मामला वर्ष 2020 … Read more

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: मात्र हस्तलिपि विशेषज्ञ की राय पर दोषसिद्धि खतरनाक, पर्याप्त पुष्टिकरण आवश्यक

Supreme Court's decision

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि केवल हस्तलिपि विशेषज्ञ की राय के आधार पर दोषसिद्धि देना उचित नहीं है, जब तक कि इसे पर्याप्त साक्ष्यों द्वारा पुष्ट न किया जाए। इस आधार पर, शीर्ष अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी, 468 और 471 के तहत आरोपी की दोषसिद्धि … Read more

सुप्रीम कोर्ट: Custom Act और GST Act के तहत गिरफ्तारी की शक्ति वैध, न्यायालय ने शर्तों की विस्तृत व्याख्या की

GST Arrest यह शक्ति बिना आधार के प्रयोग नहीं की जा सकती।

मुख्य बिंदु- यह शक्ति बिना आधार के प्रयोग नहीं की जा सकती। गिरफ्तारी का आधार उचित प्रमाणों पर आधारित हो। यह स्पष्ट किया जाए कि अपराध संज्ञेय है या ग़ैर-संज्ञेय। धारा 104(4) के तहत सूचीबद्ध अपराधों के अलावा अन्य मामलों में गिरफ्तारी से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति ली जाए। अधिकारी को गिरफ्तारी के समय सभी … Read more

दिल्ली हाईकोर्ट: सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि, दोषी की सजा बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 397 और 401 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी की सजा की पुष्टि की। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में वास्तविक प्रगति करनी है, … Read more

रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण बढ़ा

रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण बढ़ा

“हास्य एक ऐसा माध्यम है, जिसका आनंद पूरा परिवार ले सकता है। ऐसे कंटेंट का निर्माण नहीं होना चाहिए, जिससे किसी को शर्मिंदगी महसूस हो। गंदी भाषा का उपयोग करना कोई विशेष प्रतिभा नहीं है।” – सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रणवीर इलाहाबादिया को बड़ी राहत देते हुए गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की … Read more

आरोपमुक्त व्यक्ति को पुनः अभियुक्त बना देना: न्यायिक रूप से एक नई मिसाल – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

यह टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय “सुदर्शन सिंह वजीर बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली)” की समीक्षा करती है। इस मामले का केंद्रीय प्रश्न यह था कि क्या किसी अदालत द्वारा आपराधिक कार्यवाही में आरोपमुक्ति (डिस्चार्ज) के आदेश को निलंबित (स्टे) किया जा सकता है, और यदि हां, तो किन परिस्थितियों में? इस प्रकरण … Read more