मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होने वाली नाबालिगों की शादी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण POCSO ACT से छूट नहीं – केरल हाईकोर्ट

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“मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार भी वैध विवाह का अस्तित्व बहस का विषय है।” POCSO अधिनियम बच्चों को सभी प्रकार के यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था। हालाँकि, यह कानून उन मामलों में अस्पष्ट हो गया है जहाँ यह व्यक्तिगत कानून के साथ ओवरलैप होता है। केरल उच्च न्यायालय KERALA HIGH COURT … Read more

यौन इरादे से किया गया कोई भी अन्य कार्य जिसमें प्रवेश के बिना शारीरिक संपर्क शामिल हो, POCSO ACT के तहत यौन हमला है – HC

Kerala High Court Pocso Act

केरल उच्च न्यायालय ने माना कि यौन इरादे से किया गया कोई भी अन्य कार्य जिसमें प्रवेश के बिना शारीरिक संपर्क शामिल हो, वह भी POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 9(f),(m) और 10 के तहत यौन हमला है। संक्षिप्त तथ्य- मामले के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैं। आरोपी ने कासरगोड में यौन अपराधों से बच्चों … Read more

सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया में अंकों का खुलासा सार्वजनिक हित या गोपनीयता का उल्लंघन नहीं बल्कि ऐसा खुलासा जनहित के लिए प्रासंगिक है – बॉम्बे हाईकोर्ट

Bombay High Court

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाया कि सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया में अंकों का खुलासा करना केवल व्यक्तिगत जानकारी नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा खुलासा जनहित के लिए प्रासंगिक है और किसी व्यक्ति की निजता पर अन्यायपूर्ण तरीके से आक्रमण नहीं करता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि … Read more

दो वयस्कों के बीच सहमति से बने रिश्ते का टूटना, आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आधार नहीं बन सकता – सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Of India on shambho border

सुप्रीम कोर्ट ने दो वयस्कों के बीच सहमति से बने रिश्ते का टूटना के मामले में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की अगर वयस्कों के बीच सहमति से ब्रेकअप हो जाता है तो ये आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आधार नहीं बन सकता। इसने इस बात पर जोर दिया कि … Read more

वादी को वकील के सिर पर सारा दोष मढ़ने और इस तरह किसी भी समय उसे अस्वीकार करने और राहत मांगने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

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सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें 4 1⁄2 वर्ष से अधिक की देरी को माफ करने के आदेश को रद्द कर दिया गया था और कहा गया था कि वादी को वकील के सिर पर सारा दोष मढ़ने और इस तरह किसी भी समय उसे अस्वीकार करने और … Read more

केरल उच्च न्यायालय: प्रसवोत्तर अवसाद बच्चे की स्थायी अभिरक्षा पिता को देने का आधार नहीं है

कन्नूर के एडीएम की कथित अप्राकृतिक मौत के मामले में जांच राज्य से CBI को स्थानांतरित करने से इनकार - केरल उच्च न्यायालय

केरल उच्च न्यायालय के समक्ष एक मामले में, याचिकाकर्ता, 1.5 वर्षीय बच्चे की माँ ने अपने बच्चे की हिरासत के संबंध में पारिवारिक न्यायालय Family Court, मावेलिक्कारा द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी। प्रतिवादी (पिता) ने बच्चे की स्थायी हिरासत और एक पूर्व आदेश को संशोधित करने के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें उसे … Read more

बेटियों द्वारा संपत्ति के उत्तराधिकार मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पिता की मृत्यु 1956 से पहले हुई है तो संपत्ति में Inheritance नहीं

किसी नाबालिग के विदेश यात्रा के अधिकार को केवल इसलिए पासपोर्ट Passport जारी करने/पुनः जारी करने से इनकार करके खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि पिता नाबालिग के आवेदन पर सहमति देकर उसका समर्थन नहीं कर रहा - बॉम्बे HC

बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आये मामला जो बेटियों द्वारा संपत्ति के Inheritance से संबंधित था। संक्षिप्त तथ्य- मामले के तथ्य इस प्रकार हैं यशवंतराव की दो पत्नियाँ थीं, लक्ष्मीबाई और भीकूबाई, और तीन बेटियाँ: लक्ष्मीबाई से उनकी पहली शादी से सोनूबाई और राधाबाई, और भीकूबाई से उनकी दूसरी शादी से चंपूबाई। … Read more

दिल्ली हाईकोर्ट: बच्चों पर शैक्षणिक प्रभाव स्थानांतरण आदेश का पालन न करने का वैध कारण नहीं है

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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले में याचिकाकर्ता प्रतिवादी कंपनी में करीब 10 साल तक सीनियर फोरमैन था। उसने दावा किया कि विमुद्रीकरण के दौरान मुद्रा विनिमय में अपने नियोक्ता की सहायता करने से इनकार करने के बाद, उसके साथ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई। जनवरी 2017 में उसका दिल्ली से चेन्नई तबादला कर दिया गया, … Read more

कलकत्ता HC : विवाह का वादा, भले ही पूरा न हुआ हो, धोखाधड़ी नहीं माना जाएगा, बशर्ते यौन संबंध सहमति से और बिना किसी छल के बनाए गए हों

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यौन संबंधों के लिए सहमति देने वाले मामले में उचित सबूत के बिना अपीलकर्ता द्वारा पीड़िता की ओर से प्रग्नेंट होने का ‘केवल दावा’ किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रतुत मामले में अपीलकर्ता पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 493 (विवाह का छलपूर्ण वादा … Read more

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति एक निहित अधिकार नहीं है और यह प्रासंगिक नियमों / दिशानिर्देशों पर आधारित होनी चाहिए

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सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मामला याचिकाकर्ता की हरियाणा पुलिस में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के बारे में था। टिंकू के पिता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल थे, जिनका नवंबर 1997 में निधन हो गया था। अपने पिता के निधन के समय टिंकू की उम्र मात्र सात वर्ष थी। उस समय हरियाणा सरकार के पास … Read more