CrPC की ये धारा महिलाओं के साथ भेदभाद करती है, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL पर सरकार को नोटिस –

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आज सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन PIL पर सुनवाई की गई जिसमें CrPC की धारा 64 को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि CrPC की धारा 64 महिलाओं के साथ भेदभाव करती है।

सुप्रीम कोर्ट Supreme Court में सोमवार को एक जनहित याचिका पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन PIL पर सुनवाई की गई, जिसमें महिला पर भेदभाव का आरोप लगाया गया है। मामला समन को लेकर है। याचिका में कहा गया है कि समन किए गए शख्स की ओर से उसके परिवार की महिला को इसे स्वीकार करने का अधिकार नहीं दिया गया है, जो उनके साथ भेदभाव को दर्शाता है। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने कानून मंत्रालय व गृहमंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब की मांग की है।

जानें क्या कहती है CrPC की धारा 64-

CrPC की धारा 64 के अनुसार, जिसे समन किया गया है यदि वह शख्स मौजूद न हो तब उसकी ओर से उसके परिवार या उसके साथ रहने वाले किसी वयस्क पुरुष सदस्य Adult Male Member को समन का जवाब देने की अपेक्षा की जाती है।

CRPC (Code of Criminal Procedure, दंड प्रक्रिया संहिता) के 37 अध्याय के अंतर्गत 484 धाराएं हैं। CrPC 1974 में लागू हुई थी। इसके लिए 1973 में कानून पारित हुआ था।

क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)?

जानकारी के लिए बता दें कि सीआरपीसी (CrPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म (Code of Criminal Procedure ) (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है। सीआरपीसी (CrPC) हिंदी में ‘दंड प्रक्रिया संहिता’ कहा जाता है। CrPC में 37 अध्याय हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं मौजूद हैं। जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है।

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1974 में लागू हुई थी सीआरपीसी (CrPC)

गौरतलब है कि सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून पारित किया गया था। इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी देश में लागू हो गई थी। तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन भी किए गए हैं।