सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कॉरपोरेट डेब्टर के KMP को भेजा गया डिमांड नोटिस ‘सेवा’ मानी जाएगी, NCLT और NCLAT का आदेश रद्द

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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कॉरपोरेट डेब्टर के KMP को भेजा गया डिमांड नोटिस ‘सेवा’ मानी जाएगी, NCLT और NCLAT का आदेश रद्द


🧑‍⚖️ Visa Coke Ltd बनाम MESCO Kalinga Steel Ltd मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कॉरपोरेट डेब्टर के Key Managerial Personnel (KMP) को उसके पंजीकृत कार्यालय पते पर डिमांड नोटिस भेजा जाता है, तो इसे इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (IBC) की धारा 8 के तहत विधिवत सेवा (deemed service) माना जाएगा।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने यह फैसला NCLAT के निर्णय के विरुद्ध दायर एक अपील में सुनाया।


⚖️ “तकनीकी त्रुटियां वास्तविक अधिकारों को नहीं रोक सकतीं”

कोर्ट ने कहा:

“प्रक्रियात्मक त्रुटि एक प्रकार की अनियमितता हो सकती है, परंतु इसे इस प्रकार से नहीं देखा जाना चाहिए जिससे याचिकाकर्ता का वास्तविक अधिकार बाधित हो। इस मामले में प्रतिवादी यह नहीं दिखा सके कि उन्हें कोई वास्तविक क्षति हुई है। अतः 31.03.2021 का नोटिस धारा 8 के तहत डिमांड नोटिस की वैध सेवा माना जाएगा।”


📌 NCLT और NCLAT के दृष्टिकोण पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए कि NCLT और NCLAT ने याचिका को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया कि नोटिस सीधे कॉरपोरेट डेब्टर को नहीं भेजा गया, बल्कि KMP को भेजा गया था—को कानून की दृष्टि से अस्थिर और अस्वीकार्य बताया।

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🧾 मामले की पृष्ठभूमि

  • अपीलकर्ता Visa Coke Ltd. ओडिशा स्थित LAM Coke निर्माण एवं विक्रय से जुड़ी कंपनी है।
  • प्रतिवादी MESCO Kalinga Steel Ltd. मिनरल्स व धातुओं के व्यापार में संलग्न है।
  • वर्ष 2019 में दोनों पक्षों के बीच LAM Coke की 12,000 MT आपूर्ति हेतु अनुबंध हुआ।
  • भुगतान की शर्तें अग्रिम भुगतान अथवा LC खोलने पर आधारित थीं, परंतु बाद में कुछ आपूर्ति क्रेडिट पर की गई, जिसकी अदायगी नहीं हुई।
  • डिफॉल्ट के बाद अपीलकर्ता ने विधिक नोटिस भेजा, और उत्तर न मिलने पर NCLT में धारा 9 के तहत याचिका दाखिल की, जिसे NCLT और फिर NCLAT ने खारिज कर दिया।

🔍 सुप्रीम कोर्ट की कानूनी व्याख्या

  • धारा 8 IBC के अनुसार, ऑपरेशनल क्रेडिटर को पहले कॉरपोरेट डेब्टर को बकाया राशि हेतु नोटिस भेजना अनिवार्य है।
  • नोटिस भेजने का उद्देश्य है—डिफॉल्ट से पहले डेब्टर को अवसर देना, जिससे या तो वह भुगतान करे या वैध कारणों से विवाद दर्ज करे।
  • कोर्ट ने यह माना कि KMP को भेजा गया नोटिस वस्तुतः कॉरपोरेट डेब्टर को ही संबोधित था।
  • यह भी रिकॉर्ड में था कि प्रक्रिया के दौरान डेब्टर ने समझौते के लिए पहल की थी, जिससे डिफॉल्ट का स्पष्ट संकेत मिलता है।

🧠 डेट ऑफ डिफॉल्ट और अनुबंध नविनीकरण का मुद्दा

कोर्ट ने कहा कि डिफॉल्ट की तिथि और अनुबंध के संभावित नविकरण (novation) से जुड़े मुद्दे मिश्रित तथ्य और विधि के प्रश्न हैं, जिन पर NCLT को अंतिम सुनवाई में विचार करना चाहिए।

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फैसला और निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने:

  • NCLT और NCLAT के आदेशों को रद्द किया।
  • अपील को स्वीकार किया।
  • पूरा मामला फिर से सुनवाई हेतु NCLT को भेजा

न्यायिक महत्व: यह फैसला IBC की धारा 8 की व्याख्या में स्पष्टता लाता है कि नोटिस की वैधता को अत्यधिक तकनीकी आधार पर नहीं खारिज किया जा सकता, और KMP को भेजे गए नोटिस को भी विधिक रूप से पर्याप्त माना जा सकता है।

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