बिहार मतदाता सूची में 65 लाख नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट की चुनाव आयोग से जवाब-तलब

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Supreme Court seeks response from Election Commission on removal of 65 lakh names from Bihar voter list

🧾विधि संवाददाता

नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025:
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार में विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) के बाद तैयार की गई मसौदा मतदाता सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में चुनाव आयोग (ECI) से 9 अगस्त तक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह निर्देश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भूइयाँ और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) की एक नई याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

⚖️ क्या है मामला?

प्रशांत भूषण, जो कि एनजीओ की ओर से पेश हुए, ने पीठ के समक्ष कहा कि चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हटाए गए मतदाताओं में कौन मृत, कौन स्थायी रूप से स्थानांतरित हुआ और किनका नाम किस अन्य कारण से हटाया गया है।

भूषण ने कहा कि राजनीतिक दलों को हटाए गए मतदाताओं की सूची दी गई है, लेकिन उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस कारण से नाम हटाया गया है।

🏛️ अदालत की टिप्पणियाँ:

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा:

“हर उस मतदाता पर नजर रखेंगे जो इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकता है। चुनाव आयोग शनिवार (9 अगस्त) तक जवाब दाखिल करे और उसके बाद भूषण देख सकते हैं कि क्या जानकारी साझा हुई है और क्या नहीं।”

अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि यह केवल एक मसौदा सूची है, नाम हटाने के कारण बाद में दिए जाएंगे। लेकिन भूषण ने आपत्ति जताई कि मतदाता को ही जानकारी नहीं मिल रही जबकि राजनीतिक दलों को सूची दी जा रही है।

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📝 ADR की याचिका में क्या मांग है?

ADR ने मांग की है कि:

  • चुनाव आयोग 65 लाख हटाए गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करे और बताये कि उन्हें क्यों हटाया गया — क्या वे मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लीकेट, या अन्य कारणों से हटाए गए हैं।
  • 1 अगस्त 2025 को जारी मसौदा मतदाता सूची में वे नाम भी सार्वजनिक किए जाएं जिन्हें BLO द्वारा “अनुशंसित नहीं” के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • इन नामों को विधानसभा क्षेत्र और बूथवार सूची के रूप में प्रकाशित किया जाए।

📌 सुप्रीम कोर्ट में लंबित अन्य याचिकाएँ:

12 और 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें चुनाव आयोग की 24 जून की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना के जरिए बिहार में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया गया, जिसमें नागरिकता के प्रमाण मांगे गए हैं।

इन याचिकाओं में याचिकाकर्ता हैं:

  • मनोज झा (राजद सांसद)
  • महुआ मोइत्रा (टीएमसी सांसद)
  • योगेन्द्र यादव (कार्यकर्ता)
  • PUCL (पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज)
  • मुजाहिद आलम (पूर्व विधायक)
  • और ADR

⚠️ संविधानिक सवाल:

ADR ने अपनी याचिका में कहा है कि:

  • ECI का आदेश मतदाताओं पर नए दस्तावेज प्रस्तुत करने की बाध्यता थोपता है।
  • यह जिम्मेदारी राज्य से हटाकर नागरिक पर डाल देता है, जो संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
  • आधार और राशन कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेजों को अमान्य ठहराना, गरीब और ग्रामीण मतदाताओं के अधिकारों का हनन है।
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📅 आगे की प्रक्रिया:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 अगस्त से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होगी और ADR अपनी सभी आपत्तियां उस दिन रख सकता है।

📌 निष्कर्ष:
यह मामला बिहार में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने और नागरिकता सिद्ध करने की बाध्यता के संवैधानिक पक्षों को लेकर एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक बहस बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चुनाव आयोग की प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता को लेकर महत्वपूर्ण सिद्धांत तय कर सकती है।

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