सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण विवाद से जुड़े अधिकांश मामलों को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। अब इस मामले पर अंतिम सुनवाई हाईकोर्ट में 2 अप्रैल से शुरू होगी।
27% OBC आरक्षण विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में Supreme Court of India ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने पहले के आदेश में संशोधन किया है और अधिकांश मामलों को फिर से Madhya Pradesh High Court को भेज दिया है। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट में ही होगा।
यह फैसला OBC आरक्षण से जुड़े लंबित मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब सभी प्रमुख मामलों की अंतिम सुनवाई हाईकोर्ट में होगी।
पहले सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिए गए थे सभी मामले
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, राज्य सरकार ने OBC आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। ये मामले अलग-अलग बेंच के सामने लंबित थे और लंबे समय से इन पर लगातार सुनवाई की मांग की जा रही थी।
इसके बाद 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कई मामलों को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया था ताकि वहां इन मामलों की एक साथ सुनवाई हो सके। हालांकि उस समय कुछ मामले तकनीकी कारणों से उस आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे।
रिव्यू याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश में बदलाव
इस त्रुटि को लेकर दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने 19 फरवरी 2026 के अपने आदेश में संशोधन किया।
कोर्ट ने आदेश में बदलाव करते हुए वे 54 मामले भी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिए, जो पहले के आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे। इस प्रकार अब OBC आरक्षण से जुड़े लगभग सभी मामले हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिए गए हैं।
दो महत्वपूर्ण मामले सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास रखे
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण याचिकाओं को अपने पास ही सुनवाई के लिए रखा है। ये मामले हैं:
- दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन
- हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन
इन दोनों मामलों पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी, जबकि बाकी सभी मामलों पर अब हाईकोर्ट फैसला करेगा।
2 अप्रैल से हाईकोर्ट में अंतिम बहस
नए आदेश के बाद OBC आरक्षण से जुड़े सभी प्रमुख मामलों की सुनवाई अब Madhya Pradesh High Court में होगी, जहां इस मामले में अंतिम बहस 2 अप्रैल से शुरू होने वाली है।
बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश 30 मार्च 2026 को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, जिसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि अब इस पूरे विवाद का मुख्य फैसला हाईकोर्ट ही करेगा।
OBC आरक्षण विवाद क्यों महत्वपूर्ण है
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा पिछले कई वर्षों से विवाद का विषय बना हुआ है। मुख्य कानूनी प्रश्न यह है कि क्या राज्य सरकार 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा से अधिक जाकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू कर सकती है या नहीं।
यह मामला सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रियाओं पर सीधे प्रभाव डालता है, इसलिए हजारों उम्मीदवारों की नियुक्तियां इस फैसले पर निर्भर मानी जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब कानूनी स्थिति काफी स्पष्ट हो गई है। अब:
- अधिकांश मामले हाईकोर्ट में तय होंगे
- हाईकोर्ट अंतिम तथ्यात्मक और कानूनी मुद्दों पर फैसला देगा
- सुप्रीम कोर्ट केवल चुनिंदा मामलों की सुनवाई करेगा
- भर्ती और आरक्षण नीति पर बड़ा फैसला आने की संभावना है
यह आदेश OBC आरक्षण विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकांश मामलों को वापस हाईकोर्ट भेजने का निर्णय बेहद महत्वपूर्ण है। अब इस पूरे मामले का भविष्य मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा, जहां 2 अप्रैल से अंतिम बहस शुरू होने जा रही है।
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