सुप्रीम कोर्ट ने बदला मौत की सज़ा: पत्नी और बच्चों की हत्या के दोषी को उम्रकैद, बिना छूट के जीवनपर्यंत जेल

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Supreme Court changes death sentence: Life imprisonment for the person found guilty of murdering his wife and children, life imprisonment without remission

सुप्रीम कोर्ट ने बायलुरु थिप्पैया बनाम कर्नाटक राज्य मामले में शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए पत्नी, साली और तीन बच्चों की नृशंस हत्या के दोषी की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल, और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने माना कि यद्यपि अपराध जघन्य है, फिर भी दोषी की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों तथा सुधार की संभावना को देखते हुए मृत्युदंड को बरकरार रखना उचित नहीं होगा।

📌 पीठ की टिप्पणी:

“दोषी को अपने कृत्य का पश्चाताप करने के लिए शेष जीवन जेल में बिताना चाहिए। उसे किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।”

🔍 मामले की पृष्ठभूमि:

2017 में, दोषी ने पत्नी, साली और बच्चों पर क्रूर हमला किया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। उसने संदेह किया था कि उसकी पत्नी बेवफा है और उसके बच्चे उसके नहीं हैं। घटना के बाद वह स्वयं पुलिस के पास गया और अपराध स्वीकार किया।

⚖️ निचली अदालतों का रुख:

ट्रायल कोर्ट ने उसे मृत्युदंड दिया था, जिसे कर्नाटक हाई कोर्ट ने बरकरार रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाई कोर्ट ने दोषी की सामाजिक, मानसिक और सुधारात्मक पृष्ठभूमि पर समुचित विचार नहीं किया।

📚 महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ:

  • दोषी अनपढ़ है लेकिन तर्कहीन नहीं।
  • उसने जेल में साक्षरता पाठ्यक्रम पूरा किया है।
  • उसकी जेल में अच्छे आचरण और आत्महत्या की कोशिशें उसके मानसिक संघर्ष को दर्शाती हैं।
  • रमेश ए. नायका बनाम रजिस्ट्रार जनरल (2025) मामले के आधार पर न्यायालय ने सुधार की संभावना, जेल में आचरण और आपराधिक पृष्ठभूमि न होने को अहम माना।
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⚖️ न्यायालय का अंतिम निर्णय:

सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा लेकिन मृत्युदंड को बिना छूट वाली आजीवन कारावास में बदलते हुए कहा कि दोषी को अपने अपराध पर जीवनभर पश्चाताप करते हुए जेल में रहना चाहिए।

मामला – बायलुरु थिप्पैया बनाम कर्नाटक राज्य

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