OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, 42% कोटा बढ़ोतरी पर रोक लगाने की याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने गोपाल रेड्डी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें तेलंगाना सरकार द्वारा स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण 42% तक बढ़ाने के फैसले का विरोध किया गया था। जानें पूरा मामला, कानूनी पृष्ठभूमि और सरकार की प्रतिक्रिया।

OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, 42% कोटा बढ़ोतरी पर रोक लगाने की याचिका खारिज

नई दिल्ली, सोमवार — तेलंगाना सरकार को स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गोपाल रेड्डी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार के OBC कोटा को 42% तक बढ़ाने के निर्णय को चुनौती दी गई थी।

राज्य के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा,

“हमारे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सभी तथ्य रखे, जिसके बाद अदालत ने यह मामला तेलंगाना सरकार के पक्ष में निपटा दिया।”

⚖️ सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की दलीलें

तेलंगाना सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि OBC कोटा वृद्धि का निर्णय विस्तृत सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर लिया गया था। सरकार ने दावा किया कि इस निर्णय से सामाजिक न्याय और समान अवसरों के संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाया गया है।

राज्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 243D और 243T के अनुरूप स्थानीय निकायों में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था।

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📜 सरकार की प्रक्रिया: सर्वे से लेकर कानून बनने तक

तेलंगाना के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बताया कि सरकार ने पहले व्यापक जाति सर्वेक्षण (Caste Survey) कराया, जिसके निष्कर्षों के बाद यह निर्णय लिया गया।

प्रभाकर ने कहा,

“हमने सर्वे किया, कैबिनेट से मंजूरी ली, विधानसभा में विधेयक पेश किया और इसे पारित कर अधिनियम (Act) बनाया। इसके बाद इसे राज्यपाल को भेजा गया, और राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति को भेज दिया। पिछले चार-पांच महीनों से यह मामला राष्ट्रपति के विचाराधीन है।”

सरकार का कहना है कि यह निर्णय सभी राजनीतिक दलों की सर्वसम्मति से लिया गया था, जिससे तेलंगाना में सामाजिक समावेशन की भावना और मजबूत होगी।


🏛️ याचिकाएँ और अदालती कार्यवाही

तेलंगाना सरकार के फैसले के खिलाफ पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई 8 अक्टूबर तक के लिए स्थगित की गई है। इसके बावजूद कुछ व्यक्तियों ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अब यह याचिका खारिज कर दी गई है।

इस पर मंत्री प्रभाकर ने कहा,

“जब मामला हाई कोर्ट में लंबित है, तब भी कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस फैसले को रोकने की कोशिश कर रहे थे। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है — हमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों में न्याय मिलेगा।”


🗳️ 42% OBC आरक्षण पर सरकार का रुख

26 सितंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार, तेलंगाना सरकार ने स्थानीय निकायों में सीटों और पदों के लिए 42% आरक्षण OBC समुदायों को देने का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि यह कदम समानता और सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि तेलंगाना का गठन 2014 में एक समावेशी और समान विकास के लक्ष्य के साथ हुआ था, और यह निर्णय उसी दिशा में एक ठोस कदम है।


📅 राजनीतिक और कानूनी प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से तेलंगाना सरकार को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मजबूती मिली है। यह निर्णय न केवल OBC समुदाय के लिए राहतकारी है बल्कि राज्य सरकार के सामाजिक न्याय के एजेंडे को भी मजबूत करता है।

अब उम्मीद की जा रही है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनाव 42% OBC आरक्षण के साथ आयोजित किए जा सकेंगे, बशर्ते राष्ट्रपति की स्वीकृति शीघ्र प्राप्त हो।


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