सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बार काउंसिल चुनावों की निगरानी करेंगे रिटायर्ड हाईकोर्ट जज, कहा—‘निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि’

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सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की निगरानी में स्वतंत्र समितियां गठित करने के संकेत दिए। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सभी राज्यों में चुनाव की तारीखें जल्द घोषित करने का निर्देश दिया।

📰 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बार काउंसिल चुनावों की निगरानी करेंगे रिटायर्ड हाईकोर्ट जज, कहा—‘निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि’

नई दिल्ली | विधि संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि देशभर में बार काउंसिल चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की निगरानी में स्वतंत्र चुनाव समितियां गठित की जाएंगी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सोमवार को यह टिप्पणी की कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और राज्य बार काउंसिल्स पर वकीलों का भरोसा कमजोर हो रहा है, इसलिए अब चुनाव प्रक्रिया पर स्वतंत्र निगरानी आवश्यक है।


⚖️ ‘बार काउंसिल चुनाव दुनिया के सबसे मुश्किल चुनाव’ — सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा,

“राज्य बार काउंसिल या बार एसोसिएशन के चुनाव दुनिया के सबसे कठिन चुनाव होते हैं। इन्हें निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से कराना जरूरी है ताकि कानूनी समुदाय का विश्वास बना रहे।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राज्य में एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र चुनाव समिति (Independent Election Committee) बनाई जाएगी। यह समिति बार काउंसिल चुनावों की पूरी प्रक्रिया — नामांकन, मतदाता सूची, मतदान और परिणाम — की निगरानी करेगी।


🗳️ BCI को चुनाव की तारीखें घोषित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से कहा कि वह राज्य बार काउंसिल्स के चुनावों की तारीखें जल्द घोषित करे।
वरिष्ठ अधिवक्ता और BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा,

“अगर चुनाव कराने के लिए रिटायर्ड जजों की नियुक्ति होती है, तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया को कोई आपत्ति नहीं है।”

उन्होंने अदालत को बताया कि पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के चुनावों की घोषणा सोमवार को की जाएगी, जबकि अन्य सात राज्यों की तारीखें इस सप्ताह के भीतर घोषित की जाएंगी।

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⚖️ ‘बार काउंसिल को चुनाव प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता’ — सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई में पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलील दी कि अदालत के आदेशों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने बताया कि दिल्ली बार काउंसिल ने 9 अक्टूबर को चुनाव की तारीखें घोषित की थीं, लेकिन 10 अक्टूबर को BCI ने एक नोटिस जारी कर उस संस्था को भंग कर दिया।

इस पर पीठ ने कहा —

“बार काउंसिल ऑफ इंडिया को चुनाव प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। लेकिन निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट अब स्थानीय रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों को सभी बार काउंसिल चुनावों के लिए नियुक्त करेगा।”


📜 सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश

इससे पहले 31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने BCI को आदेश दिया था कि:

  • पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल चुनावों के लिए 10 दिनों में नोटिफिकेशन जारी करें।
  • 31 दिसंबर 2025 तक वहां चुनाव कराएं।
  • उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक कराए जाएं।
  • मतदाता सूची से संबंधित सभी सही और वैध शिकायतों का समाधान किया जाए।

कोर्ट ने यह निर्देश तब दिए जब उसे बताया गया कि पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के चुनावों के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई थी और उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को वेबसाइट पर अपलोड करने में भी लापरवाही बरती जा रही थी।


🧑‍⚖️ कानूनी समुदाय में बढ़ती पारदर्शिता की मांग

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम कानूनी पेशे में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों से बार काउंसिल चुनावों में अनियमितताओं और राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं। अब रिटायर्ड जजों की निगरानी में यह प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है।

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