यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 असांविधानिक करार, एक्ट धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन, सरकारी मदरसे होंगे बंद

Like to Share

इलाहाबाद उच्च न्यायलय के निर्णय के उपरांत लखनऊ के 121 मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर संकट के बादल हैं। लखनऊ में कुल 121 मदरसे संचालित होते हैं, इनमें से 18 अनुदानित तथा बाकी मान्यताप्राप्त हैं। इन मदरसों में करीब 21 हजार छात्र छात्राएं पढ़ते हैं।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने अंशुमान सिंह राठौर व पांच अन्य की याचिकाओं यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। याचिकाओं में उप्र मदरसा बोर्ड शिक्षा कानून की सांविधानिकता को चुनौती देते हुए मदरसों का प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा किये जाने के औचित्य आदि पर सवाल उठाए गए थे। प्रदेश में मदरसों की जांच के लिए सरकार ने अक्तूबर 2023 में एसआईटी का गठन किया था। जांच में अवैध तरीके संचालित होते पाए गए हजारों मदरसों को बंद करने की तैयारी चल रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असांविधानिक करार दिया। कहा कि यह एक्ट धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला यानी कि इसके खिलाफ है। जबकि धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे का अंग है। कोर्ट ने राज्य सरकार से मदरसे में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में तत्काल समायोजित करने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि छह से 14 साल तक के बच्चे मान्यता प्राप्त संस्थानों में दाखिले से न छूटें।

Must Read -  उच्च न्यायलय ने UIDAI से मांगी FAKE आधार कार्ड वालों की डिटेल, भर्तियों से जुड़ा है मामला-

कोर्ट के आदेश से यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले करीब 21 हजार विद्यार्थी प्रभावित होंगे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार ने बताया कि लखनऊ में कुल 121 मदरसे हैं। जिनमें 18 अनुदानित और अन्य मान्यता प्राप्त है। इनमें 21 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आगे शासन के आदेश पर कार्यवाही की जाएगी।

संविधान के अनुच्छेद 13 के अन्तर्गत अल्पसंख्यकों को ये हक मिलता है कि वे अपनी पसंद के शैक्षिक इदारे स्थापित कर सकें। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कानून को धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए आदेश दिया है कि सरकार मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में समायोजित करे।

जानकारी हो की उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में तमाम मदरसों को विदेश से फंडिंग होने के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें करीब 13 हजार मदरसों में तमाम गड़बड़ियां होने का खुलासा अपनी रिपोर्ट में किया है। बीते छह माह से जांच कर रही एसआईटी अपनी दो रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट दी जाएगी। एसआईटी की अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि नेपाल सीमा से सटे जिलों में सैंकड़ों की संख्या में मदरसे खोले जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर अपनी आय व व्यय का हिसाब एसआईटी को नहीं दे सके। चंदे से मदरसे के निर्माण का दावा तो किया, लेकिन पैसा देने वालों का नाम नहीं बता सके।

Must Read -  'प्रावधान की कठोरता इसे कम करने का कोई कारण नहीं है': SC ने नियम 9(5) को बरकरार रखा, SARFAESI नियम सुरक्षित लेनदार द्वारा पूरी बयाना राशि को जब्त करने में सक्षम बनाता है