सुप्रीम कोर्ट ने जैकलीन फर्नांडिस की याचिका खारिज की, कहा- मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल जारी रहेगा

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सुप्रीम कोर्ट ने जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग केस की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने उन्हें उचित चरण पर दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की छूट दी।

🚨 सुप्रीम कोर्ट ने जैकलीन फर्नांडिस की याचिका खारिज की, कहा- मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल जारी रहेगा



सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को झटका देते हुए उनकी वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। यह मामला कथित ठग सुक्श चंद्रशेखर से जुड़ा है।

जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई संभव नहीं है। हालांकि अदालत ने जैकलीन को यह छूट दी कि वे मुकदमे की कार्यवाही के उचित चरण पर फिर से अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं।


हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर आपत्ति

सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी, जो जैकलीन की ओर से पेश हुए, ने दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियां ट्रायल को प्रभावित कर सकती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां केवल quashing petition निपटाने तक ही सीमित हैं और उनका ट्रायल पर असर नहीं होगा।


“दोस्त के तोहफे पर शक” – सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, “आरोप यह है कि ये उपहार आपको दिए गए। अभी तक कुछ साबित नहीं हुआ है। आरोप तय करने के चरण में आपको इन्हें मानना होगा। यदि कोई दोस्त दूसरे को तोहफा देता है और बाद में वही व्यक्ति किसी अपराध में फंस जाता है, तो स्थिति जटिल हो जाती है।”

रोहतगी ने तर्क दिया कि PMLA की धारा 3 के तहत अपराध में अज्ञानता से शामिल होना भी जरूरी है। इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि यह ‘unknowingly’ वाला मामला नहीं है और जैकलीन उचित समय पर अदालत आ सकती हैं। इसके बाद रोहतगी ने याचिका वापस ले ली।

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पृष्ठभूमि

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में जैकलीन की quashing plea खारिज की थी।
  • अभिनेत्री ने ED के ECIR और दूसरी सप्लीमेंट्री शिकायत, जिसमें उन्हें 10वां आरोपी बनाया गया था, को चुनौती दी थी।
  • हाईकोर्ट ने कहा था कि आत्म-अभियोजन (self-incrimination) की आशंका के आधार पर ECIR रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि संवैधानिक व वैधानिक सुरक्षा पहले से उपलब्ध हैं।
  • यह मामला उस 200 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा है जिसमें सुक्श चंद्रशेखर पर रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स शिविंदर और मलविंदर सिंह की पत्नियों को धोखा देने का आरोप है।

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