📄 सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अयोग्य ठहराए गए सपा नेता इरफ़ान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को विधायक बने रहने दिया जाए। इरफ़ान सोलंकी ने आगजनी मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की है।
“आपकी पत्नी निर्वाचित हैं। उस गरीब महिला को विधायक रहने दीजिए। अगले दो साल तक कोई चुनाव नहीं होना है।”
सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी: इरफ़ान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को विधायक बने रहने दें
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अयोग्य ठहराए गए नेता इरफ़ान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को विधायक बने रहने दिया जाना चाहिए। नसीम सोलंकी ने पिछले वर्ष नवंबर में उपचुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश के सीसामऊ सीट से विधायक पद हासिल किया था।
यह टिप्पणी इरफ़ान सोलंकी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई जिसमें उन्होंने आगजनी मामले में सज़ा के चलते हुई अपनी अयोग्यता को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति सूर्या कांत, उज्जल भुइयां और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा:
“आपकी पत्नी निर्वाचित हैं। उस गरीब महिला को विधायक रहने दीजिए। अगले दो साल तक कोई चुनाव नहीं होना है।”
पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि जब इरफ़ान सोलंकी की अयोग्यता के कारण उनकी पत्नी को जीत मिली है, तो फिर उसी आधार पर दोषसिद्धि पर रोक की मांग कैसे की जा सकती है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का सुझाव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इरफ़ान सोलंकी के वकील चाहे तो इसी तरह की राहत इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांग सकते हैं। अदालत ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट को छह माह में मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया जा सकता है।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने इरफ़ान सोलंकी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और मामले की अगली तारीख बाद में तय की जाएगी।
मामला क्या है?
इरफ़ान सोलंकी और चार अन्य को जून 2023 में कानपुर नगर की सेशन कोर्ट ने एक महिला का मकान जलाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इंकार कर दिया लेकिन जमानत दे दी थी।
सोलंकी का कहना है कि उन पर दर्ज केस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और प्रशासनिक दबाव का परिणाम है तथा गवाह या तो “चांस विटनेस” हैं या फिर दुश्मनी के कारण पक्षपाती। उन्होंने दलील दी है कि दोषसिद्धि न रोकी गई तो यह न सिर्फ़ उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा बल्कि करीब 2.7 लाख मतदाताओं के अधिकारों को भी नुकसान पहुंचाएगा।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख आदेश की प्रति में दर्शाई जाएगी। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी इरफ़ान सोलंकी का पक्ष रखेंगे, जबकि एएसजी के.एम. नटराज और अधिवक्ता अंकित गोयल उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए।
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