सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 38 करने की तैयारी, लंबित मामलों पर फोकस

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की तैयारी, लंबित मामलों पर फोकस

केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के लिए बिल लाएगी। बढ़ते लंबित मामलों और न्यायिक बोझ को कम करने पर फोकस।


🔴 सुप्रीम कोर्ट में जज बढ़ाने का फैसला

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा, जिसके जरिए जजों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 जज हैं, जिसे बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव है।


⚖️ संसद की मंजूरी के बाद लागू होगा बदलाव

सरकार के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक को संसद से मंजूरी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा।

इससे कुल संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) भी शामिल होंगे।


📊 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 10 से 38 तक का सफर

सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या समय के साथ लगातार बढ़ती रही है:

  • 1956: मुख्य न्यायाधीश के अलावा 10 जज
  • 1960: संख्या बढ़कर 13
  • बाद में: 17 जज
  • 1986: 25 जज
  • 2009: 30 जज
  • 2019: 33 जज (CJI के अलावा)

अब 2026 में इसे फिर बढ़ाकर कुल 38 करने की तैयारी है।

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⚠️ बढ़ते लंबित मामलों का दबाव

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न्याय में देरी एक गंभीर चुनौती बन गई है।

सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ाने से इस बोझ को कम करने में मदद मिलेगी और मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।


🏛️ संविधान पीठ के मामलों में आएगी तेजी

जजों की संख्या बढ़ने से अधिक बेंच का गठन संभव होगा। इससे विशेष रूप से संविधान पीठ (Constitution Bench) के मामलों और महत्वपूर्ण संवैधानिक अपीलों की सुनवाई तेज हो सकेगी।

इसके साथ ही, आम नागरिकों के दीवानी और फौजदारी मामलों का भी जल्दी निपटारा होने की उम्मीद है।


🧾 कैबिनेट ने दी मंजूरी

इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे विधेयक के रूप में संसद में पेश किया जाएगा।

यह कदम न्यायपालिका के बढ़ते कार्यभार को संतुलित करने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।


🌐 आम जनता को क्या होगा फायदा?

जजों की संख्या बढ़ने से:

  • लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा
  • सुनवाई में देरी कम होगी
  • न्याय तक पहुंच आसान होगी

यह फैसला आम नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


📌 सरकार का दृष्टिकोण

केंद्र सरकार का कहना है कि यह पहल न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने के लिए की जा रही है।

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बढ़ती जनसंख्या, जटिल मामलों और बढ़ते मुकदमों को देखते हुए न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाना समय की मांग है।


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