सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को वोडाफोन आइडिया के ₹5,606 करोड़ AGR बकाया पुनर्विचार की अनुमति दी

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सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया के ₹5,606 करोड़ AGR बकाया पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार की अनुमति दी। कोर्ट ने माना कि सरकार के 49% इक्विटी हिस्सेदारी और 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए पुनर्विचार आवश्यक है।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “20 करोड़ उपभोक्ताओं के हित में सरकार वोडाफोन आइडिया के AGR बकाया पर पुनर्विचार कर सकती है”

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को वोडाफोन आइडिया के ₹5,606 करोड़ AGR बकाया पुनर्विचार की अनुमति दी

नई दिल्ली, अक्टूबर 2025:
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वोडाफोन आइडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को उसके खिलाफ उठाए गए ₹5,606 करोड़ के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया पर पुनर्विचार करने की अनुमति दे दी।

यह मामला वर्ष 2016-17 की अवधि से संबंधित है, जिसमें दूरसंचार विभाग (DoT) ने वोडाफोन आइडिया पर अतिरिक्त AGR बकाया का दावा किया था।


📜 सुनवाई के दौरान केंद्र का रुख

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए और सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया कि मामले की परिस्थितियों में अब बड़ा परिवर्तन आ चुका है।

उन्होंने कहा,

“अब सरकार ने कंपनी में 49% इक्विटी हिस्सेदारी ली है। यह मामला केवल एक निजी विवाद नहीं, बल्कि 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा हुआ है। सरकार का हित जनहित में है, और यदि कंपनी को नुकसान होता है, तो इससे उपभोक्ताओं को गंभीर समस्याएं होंगी।”


⚖️ सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन

पीठ ने कहा कि सरकार के इस रुख को देखते हुए वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और सरकार को AGR बकाया के पुनर्विचार की अनुमति देती है।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा —

“सॉलिसिटर जनरल ने यह जानकारी दी है कि परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा वोडाफोन आइडिया में 49% इक्विटी हिस्सेदारी लेना और 20 करोड़ उपभोक्ताओं का हित शामिल है, केंद्र सरकार मामले पर पुनर्विचार के लिए तैयार है। यदि अदालत अनुमति दे, तो सरकार उचित निर्णय लेगी।”

पीठ ने आगे कहा —

“यह मामला सरकार के नीति क्षेत्राधिकार में आता है। यदि सरकार, वर्तमान तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, सार्वजनिक हित में इस मुद्दे को सुलझाना चाहती है, तो उसे ऐसा करने से रोका नहीं जा सकता।”


🧾 सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया — “यह आदेश केवल इस मामले के विशेष तथ्यों पर आधारित”

न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आदेश सामान्य मिसाल (precedent) नहीं बनेगा और केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों पर आधारित है।

आदेश में कहा गया —

“हम यह स्पष्ट करते हैं कि यह आदेश केवल इस मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में दिया गया है। सरकार को पुनर्विचार करने की अनुमति दी जाती है, और याचिका का निपटारा किया जाता है।”


🏛️ पृष्ठभूमि: AGR विवाद क्या है?

AGR (Adjusted Gross Revenue) विवाद पिछले दो दशकों से देश के दूरसंचार क्षेत्र में सबसे बड़ी वित्तीय चुनौतियों में से एक रहा है। इस विवाद में सरकार और दूरसंचार कंपनियों के बीच राजस्व की परिभाषा पर मतभेद है — सरकार का कहना है कि लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज की गणना करते समय कंपनी की कुल आय को शामिल किया जाना चाहिए, जबकि टेलीकॉम कंपनियां गैर-दूरसंचार आय को इसमें शामिल नहीं करने की मांग करती रही हैं।

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साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके बाद वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों पर भारी बकाया देनदारियां आ गईं।


💡 सरकार की हिस्सेदारी और राहत की उम्मीद

2023 में सरकार ने वोडाफोन आइडिया में 49% हिस्सेदारी लेकर इसे सार्वजनिक क्षेत्र की आंशिक भागीदारी वाली कंपनी में बदल दिया। इसका उद्देश्य कंपनी को वित्तीय राहत देना और देश के दूरसंचार ढांचे को स्थिर रखना था।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न्यायिक विवेक और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन का उदाहरण है।


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