लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

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लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की लैंड फॉर जॉब स्कैम रद्द करने की याचिका खारिज की, लेकिन ट्रायल के दौरान कानूनी आपत्तियां उठाने की छूट दी।


कथित “लैंड फॉर जॉब” घोटाले में Lalu Prasad Yadav को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें ट्रायल के दौरान अपनी कानूनी आपत्तियां उठाने की अनुमति दे दी है।


🔹 सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला रहा

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कोई विस्तृत आदेश पारित नहीं किया।

हालांकि, कोर्ट ने राहत देते हुए यह स्पष्ट किया कि:

इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील का निपटारा कर दिया।


🔹 क्या है “लैंड फॉर जॉब” मामला

यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से जुड़ा है।
आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने कथित तौर पर:

  • रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां दीं
  • इसके बदले नौकरी चाहने वालों या उनके परिजनों से
  • पटना समेत विभिन्न स्थानों पर जमीन अपने परिवार या संबंधित संस्थाओं के नाम ट्रांसफर कराई
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सीबीआई के अनुसार, ये लेन-देन बिना किसी सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया के किए गए।

हालांकि, यादव परिवार ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है।


🔹 दिल्ली हाईकोर्ट का रुख

इससे पहले Delhi High Court ने 24 मार्च को यादव की याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा था कि:

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A
  • केवल भविष्य (prospective) में लागू होती है
  • इसलिए 2004–2009 के कथित कृत्यों पर इसका लाभ नहीं दिया जा सकता

इसी फैसले को चुनौती देते हुए यादव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।


🔹 अभियोजन पक्ष के तर्क

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट में दलील दी कि:

  • यादव को धारा 17A का संरक्षण नहीं मिल सकता
  • यह प्रावधान केवल तब लागू होता है जब
    • किसी लोक सेवक के आधिकारिक निर्णय की जांच हो
    • और वह निर्णय उसके अधिकार क्षेत्र में आता हो

राजू के अनुसार, रेलवे में नियुक्तियां करने का अधिकार यादव के पास प्रत्यक्ष रूप से नहीं था, इसलिए इस प्रावधान का लाभ नहीं दिया जा सकता।


🔹 कपिल सिब्बल की दलील

यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने अभियोजन के रुख पर सवाल उठाया।

उन्होंने तर्क दिया कि:

  • अभियोजन पक्ष अपने तर्क बदल रहा है
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका को जिस आधार पर खारिज किया, वह अलग था

सिब्बल ने यह भी कहा कि:

  • खुद अभियोजन के आरोप बताते हैं कि यादव ने रेल मंत्री के रूप में काम किया
  • इसलिए यह मामला “आधिकारिक कृत्य” के दायरे में आता है
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🔹 सुप्रीम कोर्ट ने क्या नहीं कहा

महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने:

  • धारा 17A की व्याख्या पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया
  • कानूनी सवालों को खुला छोड़ दिया

इसका मतलब है कि ये मुद्दे अब ट्रायल कोर्ट में विस्तार से उठाए जाएंगे।


🔹 आगे क्या होगा

अब मामला निचली अदालत में आगे बढ़ेगा, जहां:

  • सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी
  • यादव अपने सभी कानूनी बचाव पेश कर सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट है कि फिलहाल राहत सीमित है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।


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