‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विवाद के बाद NCERT ने पाठ्यक्रम समिति बदली

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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने 20 सदस्यीय नई पाठ्यक्रम समिति गठित की, कक्षा 8 की विवादित पुस्तक वापस ली और बिना शर्त माफी मांगी।


सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बड़ा कदम

National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” उप-अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद अपनी पाठ्यक्रम समिति का पुनर्गठन कर दिया है।

यह कदम Supreme Court of India की 11 मार्च के आदेश के बाद उठाया गया, जिसमें शैक्षणिक सामग्री की प्रकृति पर गंभीर आपत्तियां जताई गई थीं।


नई 20 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित

NCERT ने 2 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर 20 सदस्यीय “नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC)” का गठन किया।

इस समिति में वी. कामकोटी, रघुवेंद्र तंवर, आर. वेंकट राव और अमरेंद्र प्रसाद बेहरा जैसे प्रमुख शिक्षाविद शामिल हैं।


पुरानी समिति के कुछ सदस्य बाहर

नई समिति में पहले की 22 सदस्यीय पैनल के कुछ सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है।

इनमें मिशेल डैनिनो, बिबेक देबरॉय और एमडी श्रीनिवास जैसे नाम शामिल हैं।


NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम निर्माण का लक्ष्य

NSTC का गठन मूल रूप से जुलाई 2023 में किया गया था, जिसका उद्देश्य National Education Policy 2020 (NEP 2020) और National Curriculum Framework for School Education 2023 (NCFSE 2023) के अनुरूप स्कूल पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करना है।

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अब पुनर्गठित समिति इसी दिशा में कार्य जारी रखेगी, लेकिन अधिक निगरानी और संवेदनशीलता के साथ।


विवादित पुस्तक वापस, बिना शर्त माफी

NCERT ने “Exploring Society: India and Beyond” (कक्षा 8, भाग-2) पुस्तक को पूरी तरह वापस ले लिया है।

संस्था ने सार्वजनिक बयान जारी कर अध्याय “The Role of Judiciary in our Society” के अंतर्गत “Corruption in the judiciary” उप-अध्याय के लिए बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी।


संवेदनशीलता और सटीकता पर जोर

NCERT ने अपने बयान में कहा कि वह शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

संस्था ने स्वीकार किया कि इस अध्याय की प्रस्तुति को लेकर गंभीर चिंताएं उठी थीं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।


निष्कर्ष: शिक्षा सामग्री पर बढ़ी न्यायिक निगरानी

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि शैक्षणिक सामग्री, विशेषकर संवेदनशील संस्थानों जैसे न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री, अब अधिक जांच और संतुलन की अपेक्षा करती है।

NCERT द्वारा समिति का पुनर्गठन और पुस्तक की वापसी इस बात का संकेत है कि शिक्षा नीति और न्यायिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो गया है।


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