NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई एक्सपर्ट कमेटी, सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों पर सख्त चेतावनी
कानून अपना काम करेगा, चाहे संबंधित व्यक्ति देश के भीतर हो या विदेश में– CJI
सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय पर आपत्ति जताते हुए विशेषज्ञ समिति बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों पर भी सख्त चेतावनी दी।
Supreme Court ने NCERT की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को विशेषज्ञों की समीक्षा के बिना प्रकाशित नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान Chief Justice of India Surya Kant ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की जा रही अभद्र टिप्पणियों पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा, चाहे संबंधित व्यक्ति देश के भीतर हो या विदेश में।
न्यायपालिका वाले अध्याय पर कोर्ट की आपत्ति
अदालत ने कक्षा 8 की NCERT पुस्तक में शामिल न्यायपालिका से संबंधित चैप्टर 4 पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यह निराशाजनक है कि इस अध्याय को तैयार करने वाली समिति में कोई भी प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ (Jurist) शामिल नहीं था।
पीठ ने कहा कि यदि इस अध्याय पर पुनर्विचार किया गया है, तो इसे विशेषज्ञों की स्वीकृति के बिना प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:
- एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश
- एक वरिष्ठ प्रैक्टिसिंग वकील
- एक वरिष्ठ शिक्षाविद
इसके अतिरिक्त अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया में National Judicial Academy को भी शामिल किया जाए, ताकि न्यायपालिका से संबंधित विषयों को सही और संतुलित तरीके से पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके।
आलोचना स्वीकार, लेकिन मर्यादा जरूरी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत न्यायपालिका की वैध और रचनात्मक आलोचना के खिलाफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि विशेषज्ञ समिति न्यायिक व्यवस्था में किसी कमी की ओर संकेत करती है, तो इसे सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाएगा।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक समीक्षा से भविष्य के विधि विद्यार्थियों और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
सोशल मीडिया टिप्पणियों पर सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि 26 फरवरी के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर कई गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी और भ्रामक टिप्पणियां फैला रहे हैं।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा:
“मैं बैल को सींगों से पकड़ने में विश्वास रखता हूं। जो लोग सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”
अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि ऐसे लोगों और प्लेटफॉर्म की पहचान की जाए जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।
विदेश में बैठे लोगों पर भी कार्रवाई संभव
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति विदेश में बैठकर भारत की संस्थाओं के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चला रहा है, तो कानून उसके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका उपयोग संस्थाओं को बदनाम करने या अनुचित हमले करने के लिए नहीं किया जा सकता।
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