झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप की जानकारी छिपाना धोखाधड़ी है। कोर्ट ने विवाह को शून्य घोषित करते हुए पत्नी के स्थायी गुजारा भत्ते को 30 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया।
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद में फैसला सुनाते हुए कहा है कि शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की बात छिपाना ‘धोखाधड़ी’ की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने इसी आधार पर पति-पत्नी की शादी को रद्द (annul) कर दिया और पत्नी को दिए जाने वाले स्थायी गुजारा भत्ते को 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया।
शादी से पहले लिव-इन छिपाना धोखाधड़ी: झारखंड हाईकोर्ट ने विवाह रद्द किया, गुजारा भत्ता 30 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये
क्या है पूरा मामला?
मामला झारखंड के एक दंपत्ति से जुड़ा है, जिनकी शादी 2 दिसंबर 2015 को हुई थी। शादी के कुछ ही समय बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।
पत्नी का आरोप था कि:
- पति शादी से पहले किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था
- यह तथ्य जानबूझकर उससे छिपाया गया, जिससे उसकी सहमति धोखे से प्राप्त की गई
- पति और ससुराल पक्ष ने उससे 15 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की
- उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया
पत्नी ने यह भी दावा किया कि 2 मार्च 2016 को उसे ससुराल से बाहर निकाल दिया गया।
फैमिली कोर्ट का आदेश
इसके बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर:
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) के तहत धोखाधड़ी के आधार पर विवाह रद्द करने
- स्थायी गुजारा भत्ता दिए जाने
की मांग की।
सुनवाई के दौरान पति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद फैमिली कोर्ट ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए:
- शादी को रद्द कर दिया
- पति को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया
गुजारा भत्ते से असंतुष्ट पत्नी, हाईकोर्ट पहुंची
हालांकि पत्नी इस रकम से संतुष्ट नहीं हुई और उसने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पत्नी की दलील थी कि:
- फैमिली कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय किसी निर्धारित कानूनी फॉर्मूले का पालन नहीं किया
- पति की आय, सामाजिक हैसियत और संपत्ति पर समुचित विचार नहीं किया गया
- पति उच्च पद पर कार्यरत है, अच्छी सैलरी प्राप्त करता है और उसके पास मूल्यवान संपत्तियां हैं
इन्हीं आधारों पर पत्नी ने 1 करोड़ रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने की मांग की।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
हाईकोर्ट ने माना कि:
- शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप की जानकारी छिपाना वैवाहिक सहमति को दोषपूर्ण बनाता है
- यह आचरण धोखाधड़ी (fraud) की श्रेणी में आता है
- पत्नी को दिए जाने वाले मुआवज़े में वृद्धि न्यायसंगत है
हालांकि कोर्ट ने पत्नी की 1 करोड़ रुपये की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन फैमिली कोर्ट द्वारा तय की गई राशि को बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया।
यह फैसला वैवाहिक कानून में ईमानदार खुलासे (full disclosure) और पत्नी के आर्थिक अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।
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