राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग के खिलाफ ₹40,000 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की चार्जशीट पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया। कोर्ट BNSS के तहत संज्ञान से पहले नोटिस के मुद्दे पर सुनवाई करेगा।
₹40,000 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की चार्जशीट पर कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली की Rouse Avenue Court ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के पूर्व निदेशक Punit Garg के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) को विचार के लिए सूचीबद्ध किया है। यह मामला कथित ₹40,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
चार्जशीट विशेष न्यायाधीश Ajay Gupta की अदालत में पेश की गई, जहां अदालत ने BNSS के तहत संज्ञान लेने से पहले नोटिस जारी करने के कानूनी पहलू पर सुनवाई तय की।
BNSS के कानूनी प्रावधान पर पहले होगी सुनवाई
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चार्जशीट पर सीधे संज्ञान लेने से पहले यह देखा जाएगा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के अनुसार आरोपी को नोटिस जारी करना आवश्यक है या नहीं।
इस कानूनी मुद्दे पर सुनवाई के लिए मामले को 8 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से विशेष लोक अभियोजक जोहेब हुसैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए, जबकि पुनीत गर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनु शर्मा पेश हुए।
मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत याचिका भी लंबित
अदालत ने इस बीच AIIMS के मेडिकल बोर्ड से 2 अप्रैल तक पुनीत गर्ग की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है। उनकी मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत याचिका 4 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
गौरतलब है कि Enforcement Directorate ने पुनीत गर्ग को 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था।
CBI की FIR के आधार पर ED ने दर्ज किया मामला
ED ने यह कार्रवाई Central Bureau of Investigation की FIR के आधार पर ECIR दर्ज करने के बाद की। CBI की FIR 21 अगस्त 2025 को दर्ज हुई थी, जिसमें आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद ED ने पुनीत गर्ग की 9 दिन की रिमांड ली थी ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों के ट्रेल, अन्य लाभार्थियों और अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) का पता लगाया जा सके। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
ED का आरोप: विदेशी कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
ED की जांच के अनुसार, पुनीत गर्ग लंबे समय तक Reliance Communications में वरिष्ठ प्रबंधकीय और निदेशक पदों पर रहते हुए बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन के अधिग्रहण, कब्जे, छिपाने, लेयरिंग और उपयोग में सक्रिय रूप से शामिल थे।
जांच में यह भी सामने आया कि अपराध से अर्जित धन को RCom की विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर संस्थाओं के माध्यम से डायवर्ट किया गया।
मैनहटन में लग्जरी अपार्टमेंट खरीदने का आरोप
ED ने आरोप लगाया कि मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा अमेरिका के न्यूयॉर्क के मैनहटन में एक लग्जरी कोंडोमिनियम अपार्टमेंट खरीदने में इस्तेमाल किया गया था।
आरोप है कि कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान इस संपत्ति को पुनीत गर्ग ने धोखाधड़ी से बेच दिया और लगभग 8.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि दुबई स्थित एक कंपनी के साथ कथित फर्जी निवेश व्यवस्था के माध्यम से अमेरिका से बाहर भेज दी गई।
ED के अनुसार यह लेनदेन रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की जानकारी या अनुमति के बिना किया गया था।
निजी खर्च और बच्चों की विदेशी शिक्षा में इस्तेमाल हुआ पैसा
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक से लिए गए सार्वजनिक धन का एक हिस्सा पुनीत गर्ग के व्यक्तिगत खर्चों में इस्तेमाल किया गया, जिसमें उनके बच्चों की विदेशी शिक्षा से संबंधित भुगतान भी शामिल हैं।
एजेंसी का दावा है कि यह पूरा मामला बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसकी जांच अभी जारी है।
निष्कर्ष
यह मामला ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा एक बड़ा कॉरपोरेट अपराध मामला माना जा रहा है। फिलहाल अदालत BNSS के कानूनी प्रावधानों के तहत संज्ञान लेने से पहले नोटिस जारी करने के मुद्दे पर विचार करेगी, जबकि आरोपी की अंतरिम जमानत और मेडिकल रिपोर्ट पर भी सुनवाई होनी है।
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