अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: इतिहास में पहली बार इतने सारे दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा-

Ahmedabad Serial Blast 2008: गुजरात की विशेष अदालत ने जुलाई 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई गई है। इतिहास में ये पहली बार है जब एक बार में इतने सारे दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। हालांकि, दोषियों की फांसी की सजा का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। क्योंकि अभी उनके पास हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का भी अधिकार है।

भारत में दोषियों को फांसी की सजा सुना तो दी जाती है, लेकिन उस पर अमल बहुत ही कम होता है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 20 साल में 2 हजार 543 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से ज्यादातर की सजा उम्रकैद में बदल दी गई है। सिर्फ 8 दोषियों को ही फांसी की सजा हुई है. इनमें से तीन आतंकी थे और 5 दुष्कर्मी।

गुजरात की विशेष अदालत ने इस सीरियल बम ब्लास्ट के 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है, और 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 2008 के अहमदाबाद बम धमाकों के दोषियों को 13 साल बाद सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने पिछले मंगलवार को इस मामले में सुनवाई पूरी कर 49 लोगों को दोषी ठहराया था।

28 आरोपियों को बरी किया गया-

कोर्ट ने मामले में 49 लोगों को दोषी ठहराया था और 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। 13 साल से अधिक पुराने मामले में कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में सुनवाई की कार्यवाही पूरी की थी। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने 2002 में गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई सदस्य मारे गए थे।

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26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के अंतराल में 21 बम विस्फोट हुए। इन हमलों में 56 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक घायल हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने 2002 के गुजरात दंगों (गोधरा नरसंहार) का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे।

78 आरोपियों पर था मुकदमा-

अहमदाबाद में हुए धमाकों के कुछ दिनों बाद पुलिस ने सूरत के अलग-अलग इलाकों से कई बम बरामद किए थे। इसके बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 FIR दर्ज की गईं। 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दिसंबर 2009 में शुरू हुआ जब कोर्ट ने सभी 35 प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ दिया। एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बना। बाद में इस मामले में चार और आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनका मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 1100 गवाहों का परीक्षण किया।