चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा – ‘बिहार में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण कानूनी और आवश्यक, आधार कार्ड अनिवार्य नहीं’

Election Commission told Supreme Court – “Voter list purification in Bihar is legal and necessary, Aadhaar card is not mandatory”

भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिहार में चल रहे विशेष तीव्र पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभ्यास का बचाव किया है। आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन व शुद्ध करना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए।

आयोग ने कहा, “यह पुनरीक्षण कार्य निर्वाचन नियमावली, 1960 के नियम 31 के तहत किया जा रहा है और यह संविधान तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत हमारी वैधानिक जिम्मेदारी है।”

किसी भी पात्र मतदाता का नाम मनमाने ढंग से नहीं हटाया गया

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ऐसे व्यक्ति का नाम नहीं हटाया जा रहा जो संबंधित पते पर निवास करता है और कानूनी रूप से योग्य है। केवल मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नामों को ही, समुचित सत्यापन के बाद हटाया जा रहा है। “फॉर्म 7 के तहत नोटिस देकर ही नाम हटाए जाते हैं, और पर्याप्त समय देकर उत्तर मांगा जाता है,” आयोग ने बताया।

आधार कार्ड वैकल्पिक, अनिवार्य नहीं

हलफनामे में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की 10 जुलाई 2025 की मौखिक टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि EPIC (मतदाता पहचान पत्र), आधार कार्ड और राशन कार्ड को स्वीकार किया जा रहा है। आयोग ने दोहराया: “आधार को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। यह केवल निवास प्रमाण के लिए एक वैकल्पिक दस्तावेज है।”

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जमीनी सत्यापन और राजनीतिक दलों की भागीदारी

आयोग ने बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं, और राजनीतिक दलों को 24 व 28 जून को भेजे गए पत्रों के माध्यम से सूचित किया गया था। साथ ही, BLO के साथ बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) को भी क्षेत्र में साथ जाने की अनुमति दी गई।

पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय

आयोग ने प्रचार, मीडिया विज्ञापन और सार्वजनिक सूचना के माध्यम से प्रवासी व अस्थायी रूप से बाहर रह रहे मतदाताओं तक सूचना पहुंचाने का प्रयास किया है। हलफनामे के साथ कई परिशिष्ट संलग्न किए गए हैं जिनमें क्षेत्रीय निर्देश, फॉर्म के नमूने, आंकड़े और राजनीतिक दलों से संवाद शामिल हैं।

मामले में याचिकाएं और याचिकाकर्ता

यह मामला RJD सांसद मनोज झा, ADR, PUCL, योगेंद्र यादव, TMC सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व विधायक मुजाहिद आलम द्वारा दाखिल याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाओं में इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 325 और 326 तथा RP Act का उल्लंघन बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अगली सुनवाई

10 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि “यह मामला लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा हुआ है – यानी वोट देने का अधिकार।” अदालत ने आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि आधार, EPIC और राशन कार्ड को मान्य दस्तावेजों के रूप में स्वीकार किया जाए।

अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई, 2025 को होगी।

Association For Democratic Reforms & Ors. बनाम भारत निर्वाचन आयोग (W.P.(C) No. 640/2025)

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