भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से राजा भोज से जुड़ा धार्मिक स्थल, हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार – मध्य प्रदेश HC

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भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हिंदू पक्ष

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी मंदिर घोषित किए जाने के बाद विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन ने शीर्ष अदालत में कैविएट दाखिल कर सुनवाई से पहले पक्ष रखने का अधिकार मांगा है।

Bhojshala Complex विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी के कुछ घंटों बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता Jitendra Singh Vishen ने शीर्ष अदालत में कैविएट याचिका दाखिल कर मांग की है कि हाईकोर्ट के फैसले पर कोई आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुना जाए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हुए 2003 की उस व्यवस्था को निरस्त कर दिया, जिसके तहत परिसर में वैकल्पिक दिनों पर नमाज की अनुमति दी गई थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

इंदौर बेंच ने अपने फैसले में माना कि भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से राजा भोज से जुड़ा धार्मिक स्थल है और हिंदू पक्ष को वहां पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त है।

अदालत ने Archaeological Survey of India (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए कहा कि अब परिसर में केवल हिंदू पूजा की अनुमति होगी और नमाज की व्यवस्था समाप्त मानी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में कैविएट क्यों?

हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता Jitendra Singh Vishen ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि यदि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाती है, तो शीर्ष अदालत किसी भी अंतरिम या अंतिम आदेश से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दे।

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कानूनी रूप से कैविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि अदालत एकपक्षीय आदेश पारित न करे।

‘ऐतिहासिक फैसला’: विष्णु शंकर जैन

हिंदू पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने मीडिया से बातचीत में फैसले को “ऐतिहासिक” बताया।

उन्होंने कहा,
“इंदौर हाईकोर्ट ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज से संबंधित माना है।”

लंदन संग्रहालय में रखी मूर्ति पर भी टिप्पणी

फैसले में अदालत ने उस मांग पर भी विचार किया, जिसमें हिंदू पक्ष ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की थी।

Vishnu Shankar Jain ने बताया कि अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को इस मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां रखने की स्वतंत्रता दी गई है।

मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि पर विचार

फैसले में अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि आवंटित करने के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है।

हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि अदालत ने समाधानपरक दृष्टिकोण अपनाते हुए दूसरी पार्टी के हितों को भी ध्यान में रखा है।

ASI को प्रबंधन की जिम्मेदारी

अदालत ने परिसर के प्रबंधन और देखरेख की जिम्मेदारी सरकार और ASI को सौंपने का निर्देश दिया है।

Vishnu Shankar Jain ने कहा,
“कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वहां केवल हिंदू पूजा होगी। ASI का वह आदेश, जिसके तहत नमाज की अनुमति थी, पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।”

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विवाद का ऐतिहासिक और कानूनी महत्व

Bhojshala Complex लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता रहा है।

वर्ष 2003 में ASI ने एक व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले ने उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट में व्यापक संवैधानिक और ऐतिहासिक बहस का विषय बनेगा।

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