AAR का आदेश बहाल, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर ग्लोबल–फ्लिपकार्ट डील में मॉरीशस DTAA लाभ खारिज करते हुए कहा कि कैपिटल गेन भारत में टैक्स योग्य है। GAAR लागू, AAR का आदेश सही ठहराया गया।
✍️ कानूनी संवाददाता | नई दिल्ली
🔴 टाइगर ग्लोबल–फ्लिपकार्ट डील पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मॉरीशस DTAA का लाभ अस्वीकार, ₹2 अरब डॉलर से अधिक के कैपिटल गेन भारत में टैक्स योग्य
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर ग्लोबल द्वारा फ्लिपकार्ट के शेयरों की बिक्री से जुड़े बहुचर्चित टैक्स विवाद में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के 28 अगस्त 2024 के निर्णय को पलट दिया है और एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (AAR) के आदेश को सही ठहराया है।
जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने स्पष्ट किया कि फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयरों की बिक्री से उत्पन्न कैपिटल गेन भारत में टैक्स योग्य है, और इस पर भारत–मॉरीशस डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत छूट नहीं दी जा सकती।
⚖️ क्या था विवाद?
यह मामला टाइगर ग्लोबल समूह की मॉरीशस-आधारित कंपनियों द्वारा:
- फ्लिपकार्ट सिंगापुर में हिस्सेदारी की बिक्री
- और उस पर भारत में कैपिटल गेन टैक्स देयता
से जुड़ा था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले यह मानते हुए राहत दी थी कि लेन-देन bona fide है और DTAA के तहत ‘grandfathered’ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को कानून और तथ्यों दोनों के विपरीत करार दिया।
📌 मामले की पृष्ठभूमि (Factual Matrix)
- टाइगर ग्लोबल की तीन कंपनियाँ मॉरीशस में पंजीकृत
- Category-I Global Business Licence और वैध Tax Residency Certificates (TRCs) प्राप्त
- 2011–2015 के बीच फ्लिपकार्ट सिंगापुर में निवेश
- फ्लिपकार्ट सिंगापुर की वैल्यू का बड़ा हिस्सा भारत स्थित एसेट्स से
- 2018 में Walmart–Flipkart डील के तहत
Fit Holdings (Luxembourg) को शेयर ट्रांसफर - कुल प्रतिफल USD 2 बिलियन से अधिक
🧾 प्रक्रिया का इतिहास
- धारा 197 के तहत nil withholding का दावा
- विभाग द्वारा अस्वीकार
- AAR के समक्ष आवेदन
- 26 मार्च 2020: AAR ने आवेदन यह कहते हुए खारिज किया कि
- लेन-देन prima facie टैक्स अवॉयडेंस है
- धारा 245R(2) के proviso (iii) से बाधित है
- दिल्ली हाईकोर्ट ने AAR का आदेश रद्द किया
- राजस्व ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की
🔍 सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
1️⃣ मॉरीशस एंटिटीज़ ‘कंड्यूट कंपनियाँ’
अदालत ने AAR के इस निष्कर्ष को स्वीकार किया कि:
- वास्तविक नियंत्रण Tiger Global Management LLC, USA के पास था
- मॉरीशस बोर्ड केवल औपचारिक अनुमोदन देता था
- बैंकिंग अधिकार, निवेश निर्णय और संरचना
— सभी USA से नियंत्रित
“असेसीज़ केवल see-through entities थीं, जिनका उद्देश्य संधि लाभ प्राप्त करना था।”
2️⃣ Article 13 के तहत छूट स्वतः नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- केवल TRC होने से DTAA का लाभ स्वतः नहीं मिलता
- Article 13 का लाभ तभी मिलेगा जब
- असेसी मॉरीशस में टैक्स के लिए liable हो
यहाँ असेसी यह साबित करने में असफल रहे कि:
- कैपिटल गेन मॉरीशस में टैक्स योग्य था
3️⃣ GAAR (Chapter X-A) पूरी तरह लागू
अदालत ने माना कि:
- धारा 96(2) के तहत टैक्स अवॉयडेंस की presumption
- असेसी इसे rebut नहीं कर पाए
“यह एक पूर्व-नियोजित (pre-ordained) संरचना थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य टैक्स से बचना था।”
लेन-देन को impermissible avoidance arrangement घोषित किया गया।
4️⃣ AAR का अधिकार क्षेत्र सही ढंग से प्रयोग
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- जब लेन-देन prima facie टैक्स अवॉयडेंस हो
- तो AAR merits पर जाने से पहले ही आवेदन खारिज कर सकता है
इसलिए:
- धारा 245R(2) proviso (iii) का प्रयोग पूरी तरह वैध था
📜 संधि और कानून पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत ने दो टूक कहा:
“DTAA का उद्देश्य दोहरे कराधान से बचाव है, न कि कर से पूरी तरह पलायन (double non-taxation)।”
2016 के प्रोटोकॉल द्वारा:
- Residence-based से Source-based taxation की ओर बदलाव
- treaty shopping पर रोक की स्पष्ट मंशा
🧠 अंतिम निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- संरचना में कोई स्वतंत्र व्यावसायिक सार (commercial substance) नहीं
- DTAA का दुरुपयोग
- GAAR पूरी तरह आकर्षित
- दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय कानूनन अस्थिर
📌 परिणाम:
✔️ सभी अपीलें स्वीकार
✔️ दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द
✔️ AAR का आदेश बहाल
✔️ 01-04-2017 के बाद उत्पन्न कैपिटल गेन भारत में टैक्स योग्य
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