₹40,000 करोड़ बैंक ऋण घोटाला: सुप्रीम कोर्ट की ED और CBI को कड़ी फटकार, जांच में देरी पर गंभीर सवाल

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अनिल अंबानी समूह से जुड़े ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक ऋण घोटाले की जांच में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने ED और CBI को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने जांच में तेजी, अलग-अलग FIR और बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए।

₹40,000 करोड़ बैंक ऋण घोटाला: सुप्रीम कोर्ट की ED और CBI को कड़ी फटकार, जांच में देरी पर गंभीर सवाल

₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक ऋण घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर तीखी टिप्पणी करते हुए जांच में हुई देरी और प्रक्रियागत खामियों पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने दोनों केंद्रीय एजेंसियों को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए हाई-वैल्यू वित्तीय जांच में दांव काफी बढ़ा दिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर बैंक ऋण के कथित दुरुपयोग और फंड डायवर्जन की कोर्ट-निगरानी में जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट्स और कई बैंकों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती चेतावनियों (red flags) के बावजूद आपराधिक कार्रवाई कई वर्षों बाद शुरू की गई।

CBI की जांच पद्धति पर सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि CBI ने वर्ष 2025 में SBI की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की, जिसे बाद में अन्य बैंकों की शिकायतों को जोड़कर विस्तारित किया गया। इस पद्धति पर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा कि

“अलग-अलग बैंकों की शिकायतें अलग-अलग लेन-देन को दर्शाती हैं, जिन्हें एक ही FIR में समाहित करना प्रक्रियागत कानून के अनुरूप नहीं लगता।”

कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत (collusion) की भी गंभीरता से जांच करे।

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ED की देरी पर भी नाराज़गी

ED की ओर से PMLA के तहत की गई कार्रवाई—जिसमें कुर्की और गिरफ्तारियां शामिल हैं—के बावजूद कोर्ट ने अस्पष्ट देरी और सीमित गति पर असंतोष जताया। पीठ ने कहा कि दोनों एजेंसियों को अब तक पर्याप्त समय मिल चुका है और उन्हें बिना और विलंब के आगे बढ़ना होगा

कोर्ट ने ED को यह भी सलाह दी कि वह वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) के गठन पर विचार करे, ताकि जांच को गति और दिशा मिल सके।

अनिल अंबानी का आश्वासन

सुनवाई के दौरान अदालत ने अनिल अंबानी की ओर से यह आश्वासन दर्ज किया कि वे पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। साथ ही, यह भी रिकॉर्ड किया गया कि जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सभी आवश्यक निवारक कदम उठाए जाएंगे।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि बड़े वित्तीय घोटालों में ढिलाई और प्रक्रियागत चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे मामला कितना ही प्रभावशाली कॉरपोरेट समूह से क्यों न जुड़ा हो। अब ED और CBI पर जांच को तेज, पारदर्शी और कानूनसम्मत तरीके से आगे बढ़ाने का दबाव और बढ़ गया है।


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