1999 हत्याकांड में महिला बरी: सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की रिश्तेदारी और पारिवारिक विवाद को माना संदेह का आधार

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1999 हत्याकांड में महिला बरी: सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की रिश्तेदारी और पारिवारिक विवाद को माना संदेह का आधार

Woman acquitted in 1999 murder case: Supreme Court considers witnesses’ kinship and family dispute as grounds for suspicion

सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रही महिला को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि सभी प्रमुख गवाह मृतक के रिश्तेदार और एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे, मृतक के परिवार में बंटवारे का विवाद था, और मृत्यु के समय को लेकर स्पष्टता नहीं थी—जिससे संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) आरोपी को दिया गया।

न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि गवाहों की मौजूदगी पर संदेह नहीं, लेकिन घटना स्थल और शव मिलने की जगह अलग होना, मृतक के माता-पिता पर अनसुलझी चोटें, और बंटवारे का विवाद—ये सभी परिस्थितियां अभियोजन की कहानी पर सवाल खड़े करती हैं।

मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, आरोपी महिला और उसके पति ने मंदिर प्रांगण में लाठियों से मृतक पर हमला किया। विवाद की जड़ उस दोपहर हुई झड़प थी, जब आरोपी महिला अपने मवेशी मृतक के खेत में चराने ले गई। मृतक के आपत्ति करने पर धक्का-मुक्की हुई और महिला ने डंडे से पैर पर प्रहार किया। बाद में पति के साथ लौटकर उसने कथित तौर पर हमला किया, जिससे मृतक की मृत्यु हो गई।

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अदालत का विश्लेषण
पीठ ने माना कि डॉक्टर की गवाही से मृत्यु का हत्यात्मक होना साबित था और मृतक के बयान को dying declaration का बल प्राप्त था, लेकिन ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने इसे महत्व नहीं दिया। मेडिकल साक्ष्यों के मुताबिक मृत्यु रात 10 बजे से 12 बजे के बीच हुई, जबकि मृतक के पिता ने 9 बजे से पहले का समय बताया।

पीठ ने कहा कि केवल मृतक के पिता ने प्रत्यक्ष हमले का दावा किया, जिनके अपने बेटे (मृतक) से संबंध अच्छे नहीं थे। बाकी गवाह सिर्फ शोर सुनकर पहुंचे और आरोपी को लाठियां लेकर भागते देखा। “मरते वक्त के बयान की संभावना ही संदिग्ध है,” अदालत ने कहा और आरोपी महिला को संदेह का लाभ देते हुए दोषसिद्धि रद्द कर दी।

मामले का शीर्षक: Shyam Kali Dubey v. State of Madhya Pradesh (Neutral Citation: 2025 INSC 947)

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