सजा निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने जयदीप सिंह सेंगर को तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। अंतरिम मेडिकल बेल बढ़ाने से इनकार, 10 साल की सजा निलंबन पर भी सुनवाई जारी। कुलदीप सेंगर और CBI को नोटिस।
उन्नाव कस्टोडियल डेथ केस में सजा पाए दोषी जयदीप सिंह सेंगर उर्फ अतुल सिंह को बड़ा झटका देते हुए Delhi High Court ने शुक्रवार को उन्हें कल तक आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडे़जा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जयदीप सिंह सेंगर तिहाड़ जेल प्रशासन के समक्ष निर्धारित समय में सरेंडर करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरेंडर के बाद ही उनकी अंतरिम मेडिकल जमानत बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई होगी।
अंतरिम मेडिकल बेल बढ़ाने से इनकार
जयदीप सिंह सेंगर को जुलाई 2024 में कैंसर के इलाज के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। यह राहत समय-समय पर बढ़ाई जाती रही। बाद में उनकी बेल विस्तार याचिका सूचीबद्ध नहीं हो सकी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया।
खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पहले सरेंडर किया जाए, अन्यथा बाध्यकारी (कोर्सिव) कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की है।
उनके वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि जयदीप सिंह सेंगर कल जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे।
10 साल की सजा निलंबन की मांग
जयदीप सिंह सेंगर, Kuldeep Singh Sengar और अन्य दोषी उन्नाव कस्टोडियल डेथ केस में 10 वर्ष की सजा काट रहे हैं। सभी ने सजा निलंबन (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) की मांग की है।
गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर इस मामले के अलावा नाबालिग दुष्कर्म केस में उम्रकैद की सजा भी भुगत रहे हैं। दोनों मामलों में उनकी अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।
पीड़िता की अपील: सजा बढ़ाने की मांग
इस बीच, उन्नाव रेप पीड़िता ने अपने पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया है। इस याचिका में कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर दंड की मांग की गई है।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा पेश हुए, जबकि सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अनुब्हा भारद्वाज ने दलील दी कि पहले याचिका की ग्राह्यता (मेंटेनेबिलिटी) पर फैसला होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा और लंबित अपीलें
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि Supreme Court of India के निर्देशानुसार इस केस का निपटारा तीन महीने के भीतर प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। हालांकि, विभिन्न अपीलें अलग-अलग पीठों के समक्ष लंबित होने के कारण निर्धारित समयसीमा में निर्णय संभव नहीं हो पा रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मंजू जैन की पीठ ने मृतक की बेटी की शीघ्र सुनवाई याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
सजा निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की कस्टोडियल डेथ मामले में सजा निलंबित कर दी थी। हालांकि, इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, जिससे सेंगर को तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
उन्नाव कस्टोडियल डेथ और रेप केस से जुड़े इन कानूनी घटनाक्रमों ने एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले को सुर्खियों में ला दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट का ताजा आदेश यह संकेत देता है कि अदालतें दोषियों को प्रक्रिया से बचने की अनुमति नहीं देंगी और न्यायिक अनुशासन का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
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