13,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में JP इंफ्राटेक के पूर्व CMD मनोज गौड़ को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत

Like to Share

13,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार जयपी इंफ्राटेक के पूर्व CMD मनोज गौड़ को पटियाला हाउस कोर्ट ने मां के निधन पर अंतिम संस्कार के लिए दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।


मां के निधन पर कोर्ट से राहत

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौड़ को उनकी मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार और संबंधित रस्में निभाने के लिए दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने मानवीय आधार पर यह राहत प्रदान की।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने आदेश पारित करते हुए मनोज गौड़ को दो सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दी, ताकि वह अपनी मां के अंतिम संस्कार और पारिवारिक दायित्वों को पूरा कर सकें।


पहले भी मां की बीमारी के आधार पर मिली थी अंतरिम जमानत

मनोज गौड़ की मां चंद्रकला गौड़ लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं और इसी आधार पर उन्हें पहले भी अंतरिम जमानत दी गई थी। 24 जनवरी को अदालत ने उनकी मां की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें 14 दिनों की अंतरिम जमानत दी थी।

उस समय अदालत ने जमानत देते हुए शर्त रखी थी कि वह 5-5 लाख रुपये के दो जमानती प्रस्तुत करेंगे। अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद मनोज गौड़ ने 19 फरवरी को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।

Must Read -  The Civil Court lacks jurisdiction to entertain a suit structured on the provisions of the Industrial Disputes Act - Supreme Court

13,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी

मनोज गौड़ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग 13,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला जयपी इंफ्राटेक से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित धन शोधन से संबंधित है।

इस मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी है और वर्तमान में उनकी नियमित जमानत याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है।


अंतिम संस्कार के लिए मांगी गई थी अंतरिम जमानत

मनोज गौड़ की ओर से पेश अधिवक्ता डॉ. फर्रुख खान ने अदालत को बताया कि उनकी मां का निधन हो गया है और परिवार में सबसे बड़े बेटे होने के नाते अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक क्रियाएं करना उनकी जिम्मेदारी है। इस आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की गई थी।

अदालत ने दलीलों पर विचार करने के बाद मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत देने का निर्णय लिया।


ED ने पहले अंतरिम जमानत आदेश को चुनौती दी थी

इससे पहले जब मनोज गौड़ को अंतरिम जमानत दी गई थी, तब प्रवर्तन निदेशालय ने उस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, अंतरिम जमानत की अवधि पूरी होने के बाद मनोज गौड़ ने नियमानुसार आत्मसमर्पण कर दिया था।

अब मां के निधन के बाद एक बार फिर अदालत ने उन्हें दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। इस दौरान उन्हें जमानत की शर्तों का पालन करना होगा और निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें फिर से आत्मसमर्पण करना होगा।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट: हाईकोर्ट Article 226 के तहत बैंक को कर्जदार को OTS देने का निर्देश देने वाला आदेश नहीं कर सकता पारित-

नियमित जमानत पर हाई कोर्ट में सुनवाई लंबित

मनोज गौड़ की नियमित जमानत याचिका फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। ट्रायल कोर्ट पहले ही नियमित जमानत देने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में अब उनकी नियमित जमानत पर अंतिम निर्णय हाई कोर्ट द्वारा लिया जाएगा।

यह मामला बड़े कॉरपोरेट वित्तीय मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग जांच, अंतरिम जमानत के मानवीय आधार और नियमित जमानत के कानूनी मानकों जैसे महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दों से जुड़ा हुआ है।


Tags:
#ManojGaur #JaypeeInfratech #MoneyLaundering #InterimBail #PatialaHouseCourt #EDCase #DelhiCourt #BailOrder #LegalNews #CorporateFraud #DelhiHighCourt #CourtOrder

Leave a Comment