सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: ड्यूटी पर जाते समय कर्मचारी की मौत को मिलेगा मुआवज़ा, दुर्घटना को ‘कर्म संबंधी’ माना

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Important decision of Supreme Court: Compensation will be given for the death of an employee while on duty, accident is considered ‘karma related’

⚖️ कर्मचारी मुआवज़ा अधिनियम के तहत ड्यूटी पर आते-जाते समय हुई दुर्घटना भी ‘कर्म संबंधी’ मानी जाएगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई कर्मचारी अपने निवास स्थान से कार्यस्थल आते समय या ड्यूटी के बाद लौटते समय दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसे कर्मचारी मुआवज़ा अधिनियम, 1923 (Employees’ Compensation Act, 1923) के तहत मुआवज़ा पाने का हक़ है — बशर्ते दुर्घटना और रोजगार के बीच “परिस्थिति, समय और स्थान” का स्पष्ट संबंध (nexus) सिद्ध हो

यह निर्णय न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट (औरंगाबाद खंडपीठ) के फैसले को पलटते हुए सुनाया।

🔎 पृष्ठभूमि:

  • मृतक कर्मचारी एक शुगर फैक्ट्री में चौकीदार के पद पर कार्यरत था।
  • 22 अप्रैल 2023 को वह सुबह 3 बजे ड्यूटी के लिए अपनी बाइक से निकला, लेकिन फैक्ट्री से 5 किमी पहले सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई
  • उसके परिवार में पत्नी, चार बच्चे और मां हैं।

परिवार ने मुआवज़े की मांग की।
फैक्ट्री प्रबंधन और बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटना कार्यस्थल के बाहर हुई, इसलिए यह “सेवा के दौरान” नहीं मानी जा सकती

🏛️ आयोग और उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण:

  • कर्मचारी मुआवज़ा आयुक्त (Commissioner) ने इसे सेवा से संबंधित मानते हुए ₹3,26,140 मुआवज़ा और 12% वार्षिक ब्याज दिया।
    साथ ही बीमा कंपनी को राशि जमा करने और नियोक्ता को 50% जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।
  • बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील की, जहां फैसले को पलटते हुए कहा गया कि मृतक कार्यस्थल पर नहीं पहुंचा था, अतः दुर्घटना सेवा से संबंधित नहीं थी।
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🧑‍⚖️ सुप्रीम कोर्ट का विश्लेषण:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

Section 3 में प्रयुक्त ‘arising out of and in the course of employment’ की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट है कि यदि कर्मचारी ड्यूटी पर जाने या लौटने के क्रम में होता है और दुर्घटना के समय, स्थान व परिस्थिति का स्पष्ट संबंध उसकी सेवा से है, तो वह मुआवज़े का पात्र है।”

  • कोर्ट ने यह भी माना कि मृतक की ड्यूटी सुबह 3 बजे से थी और वह समय पर पहुंचने की कोशिश में था।
  • इसलिए, दुर्घटना स्पष्ट रूप से “रोज़गार के दौरान” हुई मानी जाएगी।

✅ परिणाम:

  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया,
  • आयोग का फैसला बहाल किया,
  • और मृतक के परिवार को न्याय दिलाया।

📌 केस शीर्षक: Daivshala & Ors. v. Oriental Insurance Company Ltd. & Anr.
(Neutral Citation: 2025 INSC 904)

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