आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी: डॉग बाइट से मौतें, जजों की दुर्घटनाएँ, ABC नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल

Like to Share

सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि Animal Birth Control (ABC) नियमों को लागू करने में प्रशासन विफल रहा है। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश दोहराए।


नई दिल्ली | लीगल रिपोर्ट

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी: डॉग बाइट से मौतें, जजों की दुर्घटनाएँ, ABC नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल

देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उससे जुड़ी जन-सुरक्षा चिंताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गंभीर चिंता व्यक्त की। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन-न्यायाधीशीय पीठ ने कहा कि Animal Birth Control (ABC) नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में संबंधित प्राधिकरण पूरी तरह विफल रहे हैं

पीठ ने टिप्पणी की,

“हमें इस बात का पूरा अहसास है कि क्या हो रहा है। बच्चे, वयस्क—लोगों को काटा जा रहा है, लोग मर रहे हैं।”

अदालत ने यह भी खुलासा किया कि पिछले 20 दिनों में दो न्यायाधीशों की सड़क दुर्घटनाएँ आवारा जानवरों के कारण हुई हैं, जिनमें से एक न्यायाधीश गंभीर रीढ़ की चोट से जूझ रहे हैं। पीठ ने इसे “बेहद गंभीर मुद्दा” करार दिया।

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुओ मोटो संज्ञान लेकर शुरू की गई उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जो सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की समस्या से संबंधित है। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

Must Read -  संविधान पीठ के समक्ष महत्वपूर्ण मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने लिखित दलीलें / संकलन दाखिल करने के लिए नए दिशानिर्देश किये जारी

बहस में क्या कहा गया?

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो पशु अधिकारों से जुड़े एक पक्ष की ओर से पेश हुए, ने दलील दी कि कुत्तों को उनके वर्तमान स्थानों से हटाना समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा,

“लोग कुत्तों को वहीं खाना देते हैं जहाँ वे रहते हैं। वे शेल्टर होम्स नहीं जाएंगे। केवल हटाने से समस्या हल नहीं होगी।”

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि गेटेड कॉलोनियों में आवारा कुत्तों को अनुमति देने या न देने का निर्णय वहाँ की Residential Welfare Associations (RWA) को बहुमत से करना चाहिए
उन्होंने तर्क दिया कि यदि 90 प्रतिशत निवासी किसी व्यवस्था को अव्यवहारिक मानते हैं और 10 प्रतिशत ज़िद करते हैं, तो सामुदायिक संतुलन बिगड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान के.के. वेणुगोपाल, कॉलिन गोंसाल्वेस, आनंद ग्रोवर और सी.यू. सिंह जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अपने-अपने तर्क रखे।

7 नवंबर का अहम आदेश

गौरतलब है कि 7 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट मामलों में “खतरनाक वृद्धि” को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि:

  • सभी शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक खेल परिसरों आदि से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
  • इन स्थानों की उचित फेंसिंग सुनिश्चित की जाए ताकि कुत्तों की पुनः एंट्री न हो।
  • पकड़े गए कुत्तों को उसी स्थान पर वापस न छोड़ा जाए, क्योंकि ऐसा करने से सार्वजनिक सुरक्षा का उद्देश्य विफल होगा।
  • स्थानीय निकायों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद, ABC नियमों के अनुरूप, निर्धारित शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करें।
Must Read -  अपराध को उचित संदेह से परे साबित करना होगा: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में छह लोगों को बरी करने के फैसले को रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला देशभर में आवारा कुत्तों के “मेनस” को देखते हुए उसके द्वारा स्वतः संज्ञान में लिया गया है और इसमें जन-सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।

टैग्स:
Supreme Court, Stray Dogs, Dog Bite Cases, Animal Birth Control Rules, Suo Motu Case, Public Safety, Kapil Sibal, Tushar Mehta

Leave a Comment