स्लम एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण में मालिक के ‘प्राथमिक अधिकार’ को सर्वोच्चता: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

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स्लम एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण में मालिक के ‘प्राथमिक अधिकार’ को सर्वोच्चता: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र स्लम एक्ट की धारा 14 के तहत राज्य सरकार की अधिग्रहण शक्ति मालिक के किसी भी प्राथमिक अधिकार के अधीन है। कोर्ट ने ज्‍योति बिल्डर्स की याचिका खारिज करते हुए केवल अंतिम सेल बिल्डिंग के लिए OC जारी करने का निर्देश दिया और संबंधित भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण सख्ती से प्रतिबंधित किया।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा—स्लम एक्ट में जमीन अधिग्रहण मालिक के प्राथमिक अधिकार के अधीन; ज्‍योति बिल्डर्स की याचिका खारिज, RG के रूप में ही इस्तेमाल का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र स्लम क्षेत्र (सुधार, समापन एवं पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने कहा कि धारा 14 को धारा 3D(c)(i) के साथ पढ़ने पर यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार की अधिग्रहण शक्ति ‘मालिक के किसी भी प्राथमिक अधिकार’ के अधीन रहती है। इसलिए, कोर्ट किसी बिल्डर को राज्य सरकार को अधिग्रहण करने का निर्देश नहीं दे सकती।

यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के उस निर्णय के खिलाफ दाखिल अपील पर दिया गया, जिसमें स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण (SRA) के CEO के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

निर्णय न्यायमूर्ति जे.बी. पर्दीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्‍वनाथन की खंडपीठ ने सुनाया।


🔹 कोर्ट का मुख्य निष्कर्ष

बेंच ने साफ कहा:

“राज्य सरकार की अधिग्रहण शक्ति धारा 14 और धारा 3D(c)(i) के तहत मालिक के प्राथमिक अधिकार के अधीन है।”

इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि:

  • ज्‍योति बिल्डर्स द्वारा मांगा गया मंडेमस (राज्य को अधिग्रहण के लिए बाध्य करने का आदेश) जारी नहीं किया जा सकता
  • अधिग्रहण को लेकर SRA-CEO के पुराने आदेश के आधार पर अब निर्देश देना बहुत देर हो चुकी है।
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मामले की पृष्ठभूमि

  • विवाद मालाड (मुंबई उपनगर) की एक जमीन से जुड़ा था।
  • यह भूमि 1987 में स्लम घोषित हुई थी और 1991 में रिक्रिएशनल ग्राउंड (RG) के लिए आरक्षित हुई।
  • इसके बाद मालिकाना हक़ और मौखिक समझौतों को लेकर कई विवाद हुए।
  • SRA ने 1997 और बाद में 2005 में स्लम पुनर्विकास योजना के लिए LOI जारी किया।
  • ज्‍योति बिल्डर्स ने दावा किया कि वह योजना का मुख्य डेवलपर है और उसने 5 पुनर्वास भवनों का निर्माण पूरा किया।

SRA के CEO ने 2015 में कहा कि बड़ा हिस्सा विकसित हो चुका है।
इसी को लेकर बिल्डर ने अधिग्रहण की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


🔹 सुप्रीम कोर्ट की विस्तृत टिप्पणियाँ

1️⃣ अधिग्रहण का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

कोर्ट ने कहा कि:

  • अधिग्रहण का आदेश न्यायालय नहीं दे सकता; यह राज्य सरकार का विवेकाधिकार है।
  • चूंकि मालिक के अधिकार सर्वोपरि हैं, इसलिए बिल्डर का दावा कानूनन टिकाऊ नहीं

2️⃣ अंतिम सेल बिल्डिंग हेतु OC जारी करने का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि:

  • SRA को 4 सप्ताह में अंतिम सेल बिल्डिंग का OC जारी करना होगा,
  • बशर्ते कि ज्‍योति बिल्डर्स 2700 वर्गमीटर RG (डार्क ग्रीन हिस्सा) तुरंत SRA/MCGM को सौंप दे।

3️⃣ भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया:

“विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होगा। इसे केवल Recreational Ground (RG) के रूप में ही इस्तेमाल किया जाएगा।”

Respondent No. 4 (Alchemi Developers) को भी निर्देश दिया गया कि:

  • वे कोई संरचना,
  • कोई व्यावसायिक गतिविधि,
  • या कोई स्थायी/अस्थायी निर्माण
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इस जमीन पर नहीं करेंगे।


4️⃣ बिल्डर पहले ही पर्याप्त FSI लाभ पा चुका है

कोर्ट ने कहा:

“अपीलकर्ता को पहले ही पर्याप्त FSI और बिक्री योग्य क्षेत्र दिया जा चुका है; इसलिए अतिरिक्त लाभ का दावा नहीं बनता।”


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि:

  • स्लम एक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण का निर्णय राज्य सरकार लेगी,
  • मालिक के प्राथमिक अधिकार किसी भी योजना पर हावी रहेंगे,
  • बिल्डर को केवल वही लाभ मिलेगा जो योजना में स्वीकृत है।

अपील को आंशिक राहत (OC निर्गमन) के साथ निस्तारित किया गया।


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