सुप्रीम कोर्ट: मशरूम उगाने में इस्तेमाल एल्यूमिनियम शेल्व्स ‘कृषि मशीनरी के पार्ट्स’ नहीं, ‘एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर’ माने जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने CESTAT के फैसले को पलटते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन के लिए आयात की गई एल्यूमिनियम शेल्व्स न तो कृषि मशीनरी हैं और न ही उनके ‘पार्ट्स’। कोर्ट ने टैक्स क्लासिफिकेशन मामलों में कॉमन पार्लेंस टेस्ट के उपयोग पर अहम सिद्धांत भी दोहराए।

सुप्रीम कोर्ट: मशरूम उगाने में इस्तेमाल एल्यूमिनियम शेल्व्स ‘कृषि मशीनरी के पार्ट्स’ नहीं, ‘एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर’ माने जाएंगे

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि मशरूम उगाने के लिए आयात की गई एल्यूमिनियम शेल्विंग को ‘कृषि मशीनरी के पार्ट्स’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इन्हें कस्टम्स टैरिफ आइटम (CTI) 76109010 के तहत ‘एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर’ के रूप में वर्गीकृत करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कस्टम्स, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (CESTAT), नई दिल्ली के 19 अप्रैल 2024 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल का यह निष्कर्ष गलत था कि ये शेल्व्स CTI 84369900 के तहत कृषि मशीनरी के ‘पार्ट्स’ हैं।

क्या था विवाद?

मामला वेलकिन फूड्स (Welkin Foods) द्वारा मशरूम उत्पादन के लिए आयात की गई एल्यूमिनियम शेल्विंग से जुड़ा था। कंपनी ने शेल्व्स के साथ फ्लोर ड्रेन और ऑटोमैटिक वाटरिंग सिस्टम भी आयात किए थे। कस्टम्स विभाग ने फ्लोर ड्रेन और वाटरिंग सिस्टम को कृषि मशीनरी के ‘पार्ट्स’ के रूप में स्वीकार कर लिया, लेकिन ऑडिट स्क्रूटनी में यह आपत्ति उठाई गई कि एल्यूमिनियम शेल्व्स वास्तव में ‘एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर’ हैं।

विभाग के अनुसार, गलत वर्गीकरण के चलते वेलकिन फूड्स पर करीब 21,01,983 रुपये की ड्यूटी कम लगाई गई थी। इसके बाद कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 28(1) के तहत नोटिस जारी किया गया और ब्याज की मांग भी की गई।

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संयुक्त आयुक्त ने शेल्व्स को CTI 76109010 के तहत वर्गीकृत किया, जिसे अपीलीय प्राधिकारी ने भी बरकरार रखा। हालांकि, CESTAT ने इन आदेशों को पलटते हुए शेल्व्स को कृषि मशीनरी के ‘पार्ट्स’ मान लिया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट का विश्लेषण

कोर्ट ने कहा कि टैरिफ वर्गीकरण के मामलों में अदालतों और ट्रिब्यूनलों को कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 की पहली अनुसूची में दिए गए जनरल रूल्स ऑफ इंटरप्रिटेशन (GRI) का क्रमवार पालन करना अनिवार्य है। GRI-1 के अनुसार, वर्गीकरण का आधार टैरिफ हेडिंग के शब्दों और संबंधित सेक्शन एवं चैप्टर नोट्स होने चाहिए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘कॉमन पार्लेंस’ या ‘ट्रेड पार्लेंस’ टेस्ट का सहारा केवल तभी लिया जा सकता है जब कानून, टैरिफ हेडिंग या HSN एक्सप्लेनेटरी नोट्स में किसी शब्द की स्पष्ट परिभाषा या मार्गदर्शन न हो।

कॉमन पार्लेंस टेस्ट पर अहम दिशानिर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने टैक्सेशन कानूनों में वर्गीकरण विवादों के दौरान कॉमन या ट्रेड पार्लेंस टेस्ट के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सिद्धांत संक्षेप में दोहराए:

  • यह टेस्ट सीमित दायरे में ही लागू किया जाना चाहिए और केवल किसी टैरिफ हेडिंग में प्रयुक्त शब्द के सामान्य या व्यावसायिक अर्थ को समझने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • जब कानून, सेक्शन नोट्स, चैप्टर नोट्स या HSN नोट्स में स्पष्ट मार्गदर्शन मौजूद हो, तब इस टेस्ट का सहारा नहीं लिया जा सकता।
  • यदि टैरिफ हेडिंग में तकनीकी या वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग किया गया है, तो कॉमन पार्लेंस टेस्ट लागू नहीं होगा।
  • इस टेस्ट का उपयोग कानून की स्पष्ट मंशा या ढांचे के विपरीत नहीं किया जा सकता।
  • HSN आधारित आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली में कॉमन पार्लेंस टेस्ट प्राथमिक विकल्प नहीं, बल्कि अंतिम उपाय है।
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‘उपयोग’ (Use) के आधार पर वर्गीकरण पर टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि किसी वस्तु के ‘उपयोग’ को वर्गीकरण का आधार केवल तभी बनाया जा सकता है, जब संबंधित टैरिफ प्रविष्टि में इसका स्पष्ट या निहित उल्लेख हो। भारत और यूरोपीय संघ में उपयोग आधारित वर्गीकरण केवल वस्तु की अंतर्निहित विशेषताओं और उसके अभिप्रेत उपयोग तक सीमित है।

क्यों नहीं मानी गईं शेल्व्स कृषि मशीनरी या उनके पार्ट्स?

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मशरूम उगाने का पूरा सेट-अप अलग-अलग स्वतंत्र मशीनों का समूह है, जैसे हेड फिलिंग मशीन, ऑटोमैटिक वाटरिंग सिस्टम और कम्पोस्ट फैलाने की मशीन। ये न तो स्थायी रूप से एक-दूसरे से जुड़ी हैं और न ही किसी एक स्पष्ट, एकीकृत कार्य के लिए साथ काम करती हैं।

कोर्ट ने कहा कि एल्यूमिनियम शेल्व्स इन मशीनों का अभिन्न हिस्सा नहीं हैं। वे केवल एक सतह प्रदान करती हैं, जिस पर मशीनें या उपकरण अपना काम करते हैं। “कोई सतह किसी वस्तु को सहारा दे सकती है, लेकिन वह स्वयं उस वस्तु का हिस्सा नहीं बन जाती,” कोर्ट ने स्पष्ट किया।

अंतिम फैसला

इन सभी कारणों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एल्यूमिनियम शेल्व्स को कृषि मशीनरी या उनके ‘पार्ट्स’ के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। इन्हें CTI 76109010 के तहत ‘एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर’ ही माना जाएगा।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने कस्टम्स विभाग की अपील स्वीकार करते हुए CESTAT का 19 अप्रैल 2024 का आदेश रद्द कर दिया।


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