Rohingya हिरासत और संभावित निर्वासन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अवैध ढंग से भारत में प्रवेश करने वालों को अधिकार, सुविधाएँ और संरक्षण का दावा करने का हक है। CJI सुर्या कांत ने कहा—“Refugee” एक कानूनी शब्द है, और बिना वैध घोषित हुए कोई भी लाभ नहीं मांग सकता। कोर्ट ने कहा कि मामला “कस्टोडियल डिसऐपियरेंस” तक सीमित है, न कि ‘शरणार्थी’ दर्जा दिलाने का।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—अवैध प्रवेश करने वाला ‘अधिकार’ नहीं मांग सकता; रोहिंग्या मामले में तीखी टिप्पणियाँ
मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को एक हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। याचिका में आरोप था कि मई 2025 में कुछ रोहिंग्या व्यक्तियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि निर्वासन (deportation) का जो विधिक ढांचा है, उसका पालन होना चाहिए—वे ‘शरणार्थी’ का दर्जा नहीं मांग रहे।
🔹 CJI की कड़ी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान CJI ने कई तीखे सवाल उठाए:
1️⃣ अवैध प्रवेश और अधिकार का दावा
CJI सुर्या कांत ने कहा:
“कोई व्यक्ति बाड़ पार करके, सुरंग बनाकर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करे और फिर कहे कि अब मुझे नोटिस मिलना चाहिए, भोजन, आश्रय मिलना चाहिए… क्या कानून को इतना खींचना चाहिए?”
उन्होंने आगे कहा:
“इस देश में हमारे अपने नागरिक गरीब हैं—क्या वे सुविधाओं के हकदार नहीं?”
2️⃣ ‘Refugee’ एक कानूनी अवधारणा — क्या सरकार ने रोहिंग्याओं को शरणार्थी घोषित किया?
CJI ने स्पष्ट कहा:
“सरकार ने इन्हें ‘refugee’ घोषित करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। Refugee एक कानूनी शब्द है।”
3️⃣ “क्या राज्य की बाध्यता है कि अवैध घुसपैठियों को भारत में रखा जाए?”
जब याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह मामला केवल कस्टोडियल डिसऐपियरेंस का है, CJI ने पूछा:
“अगर कोई घुसपैठिया है, जिसका कोई कानूनी स्टेटस नहीं—क्या राज्य की बाध्यता है कि उसे देश में रखा जाए?”
🔹 याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की वकील ने कहा:
- वे न तो ‘refugee’ का दर्जा मांग रहे हैं,
- और न ही निर्वासन को चुनौती दे रहे हैं।
- उनका मामला केवल यह है कि कोई व्यक्ति हिरासत में लिया जाए तो due process के बिना वह गायब नहीं हो सकता।
उनका कहना था:
“राज्य का दायित्व है कि जो भी अवैध रूप से रह रहा है उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देश से बाहर करे।”
🔹 CJI की प्रतिक्रिया: सुरक्षा और व्यावहारिकता सर्वोपरि
CJI ने चेताया:
“उत्तर भारत की सीमाएँ बेहद संवेदनशील हैं… ऐसे में किसी भी अवैध रूप से प्रवेश करने वाले को ‘red carpet’ नहीं बिछाया जा सकता।”
और आगे कहा:
“बहुत fanciful चीज़ें मत माँगिए—कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। Litigation multiply मत कीजिए।”
🔹 सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का हस्तक्षेप
SG मेहता ने कहा:
- प्रभावित व्यक्ति स्वयं कोर्ट आ सकते हैं,
- PIL में हर किसी की ओर से मामले दाखिल करना उचित नहीं,
- और याचिकाकर्ता पहले भी कई समान याचिकाएँ दाखिल कर चुके हैं।
🔹 मामला किस बारे में है?
- याचिका Rita Manchanda द्वारा
- आरोप: रोहिंग्या व्यक्तियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, बाद में कोई सूचना नहीं दी
- माँग:
- उन्हें शरणार्थी घोषित करना नहीं,
- केवल deportation प्रक्रिया का पालन हो
- और हिरासत में लिए गए लोगों का ठिकाना बताया जाए
Case Title:
Rita Manchanda v. Union Of India [W.P.(Crl.) No. 505/2025]
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