सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज की, महाभियोग की सिफारिश पर रोक से इनकार

Like to Share

Supreme Court rejects Justice Yashwant Verma’s petition, refuses to stay impeachment recommendation

🧾विधि संवाददाता

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इन-हाउस तीन-न्यायाधीश जांच समिति की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा की गई महाभियोग की सिफारिश को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने वर्मा की यह दलील खारिज कर दी कि उन्हें जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया

⚖️ क्या है मामला?

मार्च 2024 में दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के दौरान दमकलकर्मियों द्वारा नकदी मिलने का दावा किया गया था। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे और घर पर मौजूद नहीं थे।

इस घटना के बाद CJI द्वारा एक इन-हाउस जांच समिति गठित की गई थी, जिसने रिपोर्ट सौंपने के बाद महाभियोग की सिफारिश की थी।

🧑‍⚖️ सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।
28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त सवाल पूछे:

  • जब जांच समिति की प्रक्रिया पर आपत्ति थी तो पहले ही चुनौती क्यों नहीं दी गई?
  • अगर समिति को असंवैधानिक मानते थे तो उसके समक्ष पेश ही क्यों हुए?
  • क्या आपको उम्मीद थी कि समिति आपके पक्ष में फैसला देगी?
Must Read -  12 नहीं, 5 केस: पुलिस की गलती पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर ₹50,000 जुर्माना

पीठ की टिप्पणी:
“आप एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं। आपको यह तर्क नहीं देना चाहिए कि आपको जानकारी नहीं थी। यदि आप असहमति रखते थे, तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट आना चाहिए था। अब जांच पूरी होने के बाद चुनौती देना उचित नहीं है।”

🏛 संसद में आगे की प्रक्रिया

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने जानकारी दी कि:

  • महाभियोग प्रस्ताव पहले लोकसभा में लाया जाएगा, फिर राज्यसभा में पारित किया जाएगा।
  • सभी राजनीतिक दलों की सहमति है कि यह एक संयुक्त निर्णय होना चाहिए।
  • केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे संसद की जिम्मेदारी है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को रोका जाए और दोषी न्यायाधीशों को हटाया जाए।”

📌 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान उपस्थित होकर और फिर निर्णय के बाद उसे चुनौती देना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। इस प्रकार, महाभियोग की प्रक्रिया को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली

🧷 Tags:

#JusticeYashwantVerma #SupremeCourtIndia #ImpeachmentOfJudge #JudicialAccountability #HighCourtJudge #KapilSibal #InHouseInquiry #SanjivKhanna #JudicialCorruption #KirenRijiju #Mahabhiyog #न्यायपालिका_में_भ्रष्टाचार #जस्टिसयशवंतवर्मा #सुप्रीमकोर्ट #लोकसभा #महाभियोग

Leave a Comment