‘जज को बाजार में बेच रहे थे’: सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वत मामले में वकील की जमानत याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने जज के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोपी वकील को फटकार लगाते हुए जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। कोर्ट ने कहा—न्यायपालिका को बेचने वालों के लिए कोई सहानुभूति नहीं।
📌 पृष्ठभूमि: जज के नाम पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट ने एक चौंकाने वाले मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उस वकील की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिस पर तलाक के मामले में अनुकूल आदेश दिलाने के नाम पर ₹30 लाख रिश्वत मांगने का आरोप है।
मामले में आरोप है कि वकील ने एक न्यायिक अधिकारी पर अपने प्रभाव का दावा करते हुए शिकायतकर्ता से पैसे मांगे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘न्यायपालिका को बेच रहा था’
मामले की सुनवाई Supreme Court of India की पीठ—Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta—के समक्ष हुई।
पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
“आप एक न्यायाधीश को खुले बाजार में बेचने की कोशिश कर रहे थे… हमें ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है।”
जब कोर्ट ने याचिका पर विचार करने में अनिच्छा जताई, तो याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली।
🏛️ हाईकोर्ट आदेश को चुनौती
याचिका में Punjab and Haryana High Court के फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोपी को जमानत देने से इनकार किया गया था।
हाईकोर्ट ने हालांकि यह छूट दी थी कि शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों से जिरह के बाद आरोपी दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकता है।
🔍 बचाव पक्ष की दलील: उम्र और लंबी हिरासत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि:
- आरोपी की उम्र लगभग 70 वर्ष है
- वह स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त है
- अगस्त 2025 से हिरासत में है
- अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं
लेकिन कोर्ट इन दलीलों से सहमत नहीं हुआ।
⚠️ सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: ‘यह सामान्य जालसाजी नहीं’
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला साधारण धोखाधड़ी या जालसाजी का नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की साख से जुड़ा गंभीर अपराध है।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
🧾 CBI ट्रैप: ₹4 लाख की आंशिक रिश्वत लेते सह-आरोपी पकड़ा गया
एफआईआर के अनुसार:
- मामला अगस्त 2025 में दर्ज हुआ
- Central Bureau of Investigation (CBI) ने ट्रैप लगाया
- सह-आरोपी ने ₹4 लाख रिश्वत के रूप में स्वीकार किए
- यह रकम कुल ₹30 लाख की मांग का हिस्सा थी
इसके बाद आरोपी वकील को गिरफ्तार किया गया।
🏛️ निचली अदालत और हाईकोर्ट में राहत नहीं
- चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत ने सितंबर 2025 में जमानत याचिका खारिज की
- हाईकोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार किया
- CBI ने तर्क दिया कि आरोप गंभीर और न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाले हैं
📌 निष्कर्ष: न्यायपालिका की साख पर समझौता नहीं
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि:
- न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप या प्रभाव का दावा बेहद गंभीर अपराध है
- अदालतें ऐसे मामलों में सख्ती से पेश आएंगी
- “न्यायपालिका को बेचने” जैसी गतिविधियों पर कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जाएगी
यह फैसला न्यायपालिका की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए एक कड़ा संदेश है।
Tags:
#SupremeCourt #CBI #BriberyCase #JudicialIntegrity #BailDenied #LegalNews #IndiaJudiciary #Corruption #CriminalLaw #PunjabHaryanaHighCourt
