NEET-PG से पहले बौद्ध बने? सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के जाट परिवार पर जताई सख्त नाराज़गी, ‘यह भी एक तरह का फ्रॉड’

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NEET-PG 2025 में अल्पसंख्यक कोटा लेने के लिए परीक्षा से ठीक पहले बौद्ध धर्म अपनाने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हरियाणा सरकार से अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा के हिसार निवासी एक जाट परिवार के उस दावे पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने परीक्षा से ठीक पहले बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक कोटे का लाभ लेने का प्रयास किया था। कोर्ट ने इसे “अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर डाका” बताते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

NEET-PG से पहले बौद्ध बने? सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के जाट परिवार पर जताई सख्त नाराज़गी, ‘यह भी एक तरह का फ्रॉड’

यह मामला नीतिन पुनिया और एकता पुनिया, जो कि कृष्ण पुनिया की संतान हैं, द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता जन्म से जनरल कैटेगरी से आते हैं और हरियाणा के हिसार जिले के निवासी हैं। उनकी दलील थी कि उन्होंने बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत सुभारती मेडिकल कॉलेज, सुभारती यूनिवर्सिटी (उत्तर प्रदेश) में NEET-PG पाठ्यक्रम के लिए चयन प्राप्त किया था, लेकिन दाख़िला नहीं हो पाया।

बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र पर उठा विवाद

याचिकाकर्ताओं ने हिसार के सब-डिविजनल ऑफिसर (सिविल) द्वारा जारी बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाणपत्रों के आधार पर कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया था। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार की 2016 की अधिसूचना के अनुसार, अल्पसंख्यक संस्थानों को राज्य सरकार से भी मान्यता लेना आवश्यक है, भले ही उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से मान्यता मिली हो। इस मान्यता से उत्तर प्रदेश सरकार ने इनकार कर दिया था।

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“परीक्षा से पहले बौद्ध बने?” — जस्टिस बागची की टिप्पणी

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के आचरण पर कड़ी मौखिक टिप्पणियां कीं।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा:

“सीधे-सीधे खारिज। आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं। आप देश के सबसे समृद्ध इलाकों में से एक से आते हैं। आपको अपनी मेरिट पर गर्व होना चाहिए। यह भी एक तरह का फ्रॉड है। हमें और टिप्पणी करने पर मजबूर न करें।”

वहीं, जस्टिस बागची ने टिप्पणी की:

“एग्ज़ामिनेशन के पहले बौद्ध हुआ?”

जनरल कैटेगरी में आवेदन, फिर अल्पसंख्यक लाभ?

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ताओं ने NEET आवेदन के दौरान स्वयं को जनरल कैटेगरी का बताया था और यह तथ्य उनके वकील ने भी स्वीकार किया।

आदेश में कोर्ट ने कहा:

“यह स्पष्ट है कि उम्मीदवार जन्म से जनरल कैटेगरी से हैं और उन्होंने जनरल कैटेगरी के रूप में ही परीक्षा दी।”

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता EWS श्रेणी से भी नहीं आते।

हरियाणा सरकार और SDO से जवाब तलब

मामले में जवाबदेही तय करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे राज्य में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित दिशानिर्देशों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।

कोर्ट ने पूछा:

“जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार, जो न तो कमजोर वर्ग से हैं और जिन्होंने स्वयं को जनरल घोषित किया है, उन्हें बौद्ध समुदाय का सदस्य कैसे माना गया?”

इसके साथ ही, SDO (सिविल), हिसार से भी यह स्पष्ट करने को कहा गया कि उन्होंने ऐसे प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किए।

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कोर्ट ने कहा कि दो सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यह याचिका एडवोकेट सिद्धार्थ प्रिया अशोक के माध्यम से दायर की गई थी।


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