सुप्रीम कोर्ट: गैर-प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव पर आरोपी को जमानत, 5.5 साल से लंबित ट्रायल पर चिंता
Supreme Court: Bail granted to accused for his association with non-banned organisation, concern over trial pending for 5.5 years
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैर-प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव मात्र अपराध नहीं है और इसी आधार पर आरोपी सलीम खान की जमानत बरकरार रखी। अदालत ने मोहम्मद ज़ैद की जमानत याचिका खारिज की और 5.5 साल से लंबित ट्रायल दो साल में पूरा करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए आरोपी सलीम खान को दी गई जमानत को सही ठहराया, जबकि एक अन्य आरोपी मोहम्मद ज़ैद को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपपत्र में दर्ज आरोप केवल उस संगठन (AL-Hind) से जुड़े हैं, जो यूपीएपीए (UAPA) की अनुसूची में प्रतिबंधित संगठन नहीं है।
पीठ की टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा:
- “केवल AL-Hind जैसे संगठन की बैठकों में शामिल होना किसी अपराध का गठन नहीं करता, क्योंकि यह प्रतिबंधित संगठन नहीं है।”
- अदालत ने यह भी माना कि 5.5 वर्षों से ट्रायल शुरू नहीं हुआ, जबकि आरोपी लगातार हिरासत में हैं। “आरोपियों को निष्पक्ष और त्वरित ट्रायल के बिना जेल में नहीं रखा जा सकता।”
पृष्ठभूमि
- दोनों आरोपियों पर IPC की धारा 120-B, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1B)(a) और UAPA की धाराओं 18, 18-A, 18-B, 19, 20, 38 और 39 के तहत मामला दर्ज हुआ था।
- मामला NIA को सौंपा गया।
- ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
- हाईकोर्ट ने आरोपी 11 सलीम खान को जमानत दी लेकिन आरोपी 20 मोहम्मद ज़ैद की याचिका खारिज कर दी।
ज़ैद की याचिका पर अदालत का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने ज़ैद को जमानत से इनकार करते हुए कहा कि:
- उनके खिलाफ प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से सक्रिय जुड़ाव के प्रमाण हैं।
- वह डार्क वेब का संचालन और आतंकी संगठनों की मदद करने में शामिल थे।
- ज़ैद का एक और मामला तमिलनाडु से संबंधित है जिसमें उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश सही है।
ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी
पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को दो साल के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।
- अभियोजन को गवाहों की पेशी सुनिश्चित करने और सहयोग देने का निर्देश दिया गया।
- साथ ही कहा गया कि यदि सलीम खान ट्रायल को टालने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
Case Title: Union of India v. Saleem Khan
Neutral Citation: 2025 INSC 1008
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