सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC की स्तन दबाना, पायजामा-स्ट्रिंग तोड़ना ‘रेप प्रयास नहीं’ वाली टिप्पणी पर लगाई रोक, ट्रायल गंभीर धाराओं में जारी रखने का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की उस टिप्पणी को स्थगित रखा है जिसमें स्तन दबाने, पायजामा की डोरी तोड़ने और culvert के नीचे घसीटने जैसी हरकतों को बलात्कार/बलात्कार के प्रयास के लिए अपर्याप्त माना गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रायल को IPC और POCSO की गंभीर धाराओं के तहत चलाने का निर्देश दिया और उचित संवेदनशीलता पर दिशानिर्देश जारी करने की मंशा व्यक्त की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की ‘अपर्याप्त आरोप’ वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया — आदेश रहेगा स्थगित, ट्रायल गंभीर धाराओं के तहत ही चलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित निर्णय को स्थगित (stay) रखने का आदेश दिया है, जिसमें कहा गया था कि महिला के स्तन दबाना, पायजामा-स्ट्रिंग तोड़ना और culvert के नीचे घसीटना—ये कृत्य रेप या रेप के प्रयास (IPC की गंभीर धाराओं) को आकर्षित नहीं करते।

CJI सुर्याकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामले में आरोपितों के खिलाफ ट्रायल अब ‘Attempt to Rape’ और ‘Rape’ (IPC) तथा POCSO Act की गंभीर धाराओं के तहत ही चलेगा, “किसी हल्की धारा” के तहत नहीं।


सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ और निर्देश

1. merits पर कोई राय नहीं, आरोपितों को चुनौती देने की स्वतंत्रता

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही।
आरोपितों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे ऊँची धाराओं को बाद में चुनौती दे सकते हैं।

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2. हाई कोर्ट की ‘असंवेदनशील’ टिप्पणियों पर दिशानिर्देश बनाएगी SC

CJI सुर्या कांत ने कहा कि देशभर के हाई कोर्ट द्वारा संवेदनशील मामलों में की गई ‘दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियाँ’ कई बार पीड़ितों और उनके परिवारों को प्रभावित करती हैं और वे आगे कार्रवाई करने से पीछे हट जाते हैं।

उन्होंने कहा:

“हम कुछ व्यापक दिशानिर्देश बनाना चाहते हैं कि हाई कोर्ट को ऐसे मामलों में कितनी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। कई टिप्पणियाँ अनजाने में छूट जाती हैं, लेकिन वे पीड़ित पक्ष को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।”

इसलिए सुप्रीम कोर्ट व्यापक ‘ज्यूडिशियल सेंसिटिविटी गाइडलाइंस’ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।


3. सुयो मोटो केस और SLP को साथ में टैग किया गया

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए सुओ मोतो (स्वप्रेरित) संज्ञान का हिस्सा है।
साथ ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल SLP (Special Leave Petition) को भी इसी मामले के साथ जोड़ दिया गया है।


4. अमिकस शोभा गुप्ता को रिपोर्ट देने का निर्देश

कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता, जो इस मामले में अमिकस हैं, को निर्देश दिया है कि वे देशभर के हाई कोर्ट में की गई ऐसी टिप्पणियों—जो पीड़ितों की संवेदनशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं—की विस्तृत सूची/रिपोर्ट दाखिल करें।
यह रिपोर्ट आगे बनने वाली सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस का आधार बनेगी।


संदर्भ

यह विवाद तब उठा जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि स्तन दबाने और pyjama-string ढीली करने जैसे कृत्य aggravated sexual assault तो बनाते हैं, लेकिन रेप या रेप के प्रयास की श्रेणी में नहीं आते। सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को पहले ही stay कर दिया था और अब प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए गंभीर धाराओं के तहत ट्रायल का आदेश दिया है।

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