इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष POCSO अदालत ने सौतेली बेटी से दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के मामले में आरोपी सौतेले पिता को दो अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने POCSO एक्ट और IT एक्ट के तहत दोषसिद्धि करते हुए पीड़िता को ₹3 लाख मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
सौतेली बेटी से दुष्कर्म पर कड़ा संदेश: इंदौर कोर्ट ने सौतेले पिता को दोहरी आजीवन कारावास की सजा दी
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर कठोर रुख अपनाते हुए इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष POCSO अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अपनी सौतेली नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के दोषी सौतेले पिता को दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल कानून का सख्त पालन दर्शाता है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
विशेष POCSO कोर्ट का फैसला
लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि POCSO एक्ट के तहत गठित विशेष अदालत, जिसकी अध्यक्षता जज नौशीन खान ने की, ने आरोपी को POCSO अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत दोषी ठहराते हुए दो अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने आरोपी को
- धारा 13 और 14 (POCSO Act) के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास,
- तथा आईटी एक्ट IT Act के तहत 3 वर्ष का कारावास भी सुनाया।
अदालत ने आरोपी पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया और पीड़िता को उसके मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए ₹3 लाख मुआवजा देने का आदेश भी पारित किया।
मामले की भयावह पृष्ठभूमि
यह मामला एक नाबालिग बच्ची से जुड़ा है, जिसके पिता का निधन हो चुका था। इसके बाद उसकी मां ने दूसरा विवाह किया। अभियोजन के अनुसार, विवाह के तुरंत बाद ही सौतेले पिता ने बच्ची के साथ यौन शोषण शुरू कर दिया।
लोक अभियोजक ने बताया कि आरोपी बच्ची को धमकी देता था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसकी जान ले लेगा। डर और दबाव में बच्ची लंबे समय तक चुप रही।
ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया, जब आरोपी कुछ समय के लिए घर छोड़कर चला गया। लगभग डेढ़ साल बाद लौटने पर उसने फिर से यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं, मामले के उजागर होने से बचने के लिए आरोपी ने मां और बेटी के नग्न अवस्था में अश्लील वीडियो बनाए, ताकि उन्हें ब्लैकमेल कर पुलिस तक मामला न पहुंचने दे।
जांच और अभियोजन
इस संवेदनशील मामले की जांच पुलिस निरीक्षक सतीश पटेल ने की, जिन्होंने गहन जांच कर ठोस साक्ष्य एकत्र किए और अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
मामले की पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजक लतिका जमरा ने की। गवाहों, मेडिकल साक्ष्यों और डिजिटल सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
कानूनी और सामाजिक संदेश
अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि POCSO अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को “घरेलू मामला” मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, चाहे आरोपी परिवार का सदस्य ही क्यों न हो।
दोहरी आजीवन कारावास की सजा यह दर्शाती है कि न्यायपालिका ऐसे अपराधों को सबसे गंभीर श्रेणी में रखती है और पीड़ितों के अधिकारों व सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि समाज को यह सख्त संदेश भी देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई सहानुभूति नहीं है।
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