बिहार चुनाव से जुड़ी PIL पर सुनवाई में CJI सूर्यकांत सख्त, याचिकाकर्ता को फटकार; पब्लिसिटी-प्रेरित याचिकाओं पर 5 साल का ITR पेश करने का आदेश।
नई दिल्ली:
‘पब्लिसिटी के लिए PIL डालना बंद करें’: बिहार चुनाव याचिका पर CJI सूर्यकांत सख्त, 5 साल का ITR मांगा
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को जनहित याचिकाओं (PIL) के दुरुपयोग को लेकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का सख्त रुख देखने को मिला। बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी एक PIL पर सुनवाई के दौरान CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अदालत का समय तुच्छ (frivolous) और प्रचार-प्रेरित याचिकाओं में बर्बाद नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान जैसे ही याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं, CJI सूर्यकांत असंतुष्ट नजर आए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“पब्लिसिटी के लिए याचिकाएं डालना बंद करें।”
5 साल का इनकम टैक्स रिटर्न पेश करने का आदेश
पीठ ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाते हुए उससे पिछले पांच वर्षों का आयकर रिटर्न (ITR) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार तुच्छ याचिकाएं दायर करता है, तो यह जानना जरूरी है कि जुर्माना लगाए जाने की स्थिति में उसकी वसूली संभव है या नहीं।
‘साबू स्टीफन बनाम भारत संघ’ मामला
यह टिप्पणी ‘साबू स्टीफन बनाम भारत संघ’ मामले की सुनवाई के दौरान आई। CJI ने कहा कि चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बिना ठोस कानूनी आधार के हस्तक्षेप करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्यायपालिका के समय और संसाधनों का दुरुपयोग भी है।
पीठ ने यह भी कहा कि ऐसी याचिकाएं अक्सर वास्तविक जनहित के लिए नहीं, बल्कि मीडिया और सार्वजनिक प्रचार हासिल करने के उद्देश्य से दायर की जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा:
“यदि आपने तुच्छ याचिकाएं दायर करने की कला में महारत हासिल कर ली है, तो हमें यह भी जानना होगा कि जुर्माना लगाए जाने पर आप कितनी कीमत चुका सकते हैं।”
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उन लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है जो PIL को राजनीतिक एजेंडा या लोकप्रियता का हथियार बनाते हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि भविष्य में बिना ठोस तथ्य और कानूनी आधार के दाखिल की गई याचिकाओं पर भारी लागत (exemplary costs) लगाई जा सकती है।
CJI सूर्यकांत के इस सख्त रुख से यह संदेश साफ है कि जनहित याचिका एक संवैधानिक औजार है, प्रचार का मंच नहीं।
टैग्स (Tags):
सुप्रीम कोर्ट, CJI सूर्यकांत, जनहित याचिका, PIL दुरुपयोग, बिहार चुनाव, इनकम टैक्स रिटर्न, फ्रिवोलस याचिकाएं
